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पञ्चाङ्गक प्रथम आ सबसँ महत्वपूर्ण अंग – सूर्य आ चन्द्रक बीचक कोणीय सम्बन्ध जे हिन्दू परम्परामे प्रत्येक कर्मकाण्ड, उत्सव आ मुहूर्त निर्धारित करैत अछि।
तिथि एक चान्द्र दिवस छी – ओ समय जाहिमे चन्द्रमा सूर्यसँ 12 अंशक कोणीय अन्तर प्राप्त करैत अछि। सौर दिनक विपरीत, तिथि पूर्णतः चान्द्र-सौर छी। एक चान्द्र मासमे 30 तिथि होइत अछि – शुक्ल पक्षमे 15 आ कृष्ण पक्षमे 15।
चन्द्र आ सूर्यक बीचक कोणीय दूरी 0° सँ 360° धरि होइत अछि। एकरा 12° सँ भाग देलापर तिथि संख्या भेटैत अछि। अमावस्यापर ई दूरी 0° आ पूर्णिमापर 180° होइत अछि।
D = (Moon_longitude - Sun_longitude + 360) mod 360
Tithi_number = floor(D / 12) + 1
यदि तिथि 1-15 → शुक्ल पक्ष
यदि तिथि 16-30 → कृष्ण पक्ष
D अगिला 12° क गुणज पार करय तखन तिथि बदलैत अछि
मानू चन्द्रमा 87.5° आ सूर्य 42.3° पर अछि। कोणीय अन्तर = 45.2°। 12° सँ भाग: 3.767। floor + 1 = 4। तँ चालू तिथि शुक्ल चतुर्थी (चौथी तिथि) अछि।
Moon = 87.5\u00b0, Sun = 42.3\u00b0
D = (87.5 - 42.3 + 360) mod 360 = 45.2\u00b0
Tithi = floor(45.2 / 12) + 1 = floor(3.767) + 1 = 3 + 1 = 4 (Shukla Chaturthi)
तिथि समाप्ति: D = 48° (4 × 12°)
Astronomical basis for tithi calculation from Sun-Moon elongation
अमावस्यासँ पूर्णिमा धरि। चन्द्र प्रत्येक रात्रि उज्ज्वल होइत अछि। कोणीय दूरी: 0° सँ 180°। नव प्रारम्भ, विस्तार आ उत्सवक लेल अधिक शुभ मानल जाइत अछि।
पूर्णिमासँ अमावस्या धरि। चन्द्र प्रत्येक रात्रि क्षीण होइत अछि। कोणीय दूरी: 180° सँ 360°। आत्मचिन्तन, उपचार, पितृ कर्म आ विसर्जन कार्यक लेल उपयुक्त।
प्रत्येक तिथिक एक अधिष्ठाता देवता आ एक ग्रह स्वामी होइत अछि। देवता दिनक आध्यात्मिक गुणवत्ता आ ग्रह स्वामी भौतिक प्रभाव नियन्त्रित करैत अछि।
| # | तिथि | देवता | ग्रह | वर्ग | अंश |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | प्रतिपदा(Pratipada) | अग्नि | सूर्य | Nanda | 0\u00b0\u201312\u00b0 |
| 2 | द्वितीया(Dwitiya) | ब्रह्मा | चन्द्र | Bhadra | 12\u00b0\u201324\u00b0 |
| 3 | तृतीया(Tritiya) | गौरी | मंगल | Jaya | 24\u00b0\u201336\u00b0 |
| 4 | चतुर्थी(Chaturthi) | गणेश | बुध | Rikta | 36\u00b0\u201348\u00b0 |
| 5 | पंचमी(Panchami) | सर्प (नाग) | गुरु | Purna | 48\u00b0\u201360\u00b0 |
| 6 | षष्ठी(Shashthi) | कार्तिकेय | शुक्र | Nanda | 60\u00b0\u201372\u00b0 |
| 7 | सप्तमी(Saptami) | सूर्य | शनि | Bhadra | 72\u00b0\u201384\u00b0 |
| 8 | अष्टमी(Ashtami) | रुद्र | राहु | Jaya | 84\u00b0\u201396\u00b0 |
| 9 | नवमी(Navami) | दुर्गा | मंगल | Rikta | 96\u00b0\u2013108\u00b0 |
| 10 | दशमी(Dashami) | धर्म | सूर्य | Purna | 108\u00b0\u2013120\u00b0 |
| 11 | एकादशी(Ekadashi) | विष्णु | चन्द्र | Nanda | 120\u00b0\u2013132\u00b0 |
| 12 | द्वादशी(Dwadashi) | विष्णु | बुध | Bhadra | 132\u00b0\u2013144\u00b0 |
| 13 | त्रयोदशी(Trayodashi) | कामदेव | गुरु | Jaya | 144\u00b0\u2013156\u00b0 |
| 14 | चतुर्दशी(Chaturdashi) | शिव | शनि | Rikta | 156\u00b0\u2013168\u00b0 |
| 15 | पूर्णिमा(Purnima) | चन्द्र | शुक्र | Purna | 168\u00b0\u2013180\u00b0 |
30 तिथि छह-छहक पाँच समूहमे वर्गीकृत अछि: नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा। प्रत्येक वर्गक विशिष्ट स्वभाव मुहूर्त चयन गहरा प्रभावित करैत अछि।
शुभ। उत्सव, शिक्षा आरम्भ, धार्मिक अनुष्ठान, विवाह वार्ता आ आनन्दमय सभाक लेल उत्तम।
लाभकारी। गृह निर्माण, सम्पत्ति खरीद, कृषि, दीर्घकालिक निवेश आ स्थिरता कार्यक लेल अनुकूल।
मिश्रित सँ प्रबल। प्रतिस्पर्धा, कानूनी लड़ाई, शत्रु विजय, खेल आ दृढ़ कार्यक लेल उत्तम।
अशुभ। नव कार्य, विवाह आ शुभ अनुष्ठानसँ बचू। विध्वंसक कार्यक लेल उपयुक्त: ध्वंस, ऋण मुक्ति, अनुबंध समाप्ति।
अत्यन्त शुभ। कार्य पूर्ण करबाक, प्रतिज्ञा पूर्ति, भव्य उत्सव, दान आ आध्यात्मिक साधनाक लेल उत्कृष्ट।
30म तिथि जखन सूर्य आ चन्द्र युतिमे होइत अछि (0° अन्तर)। सबसँ अन्हार रात्रि। पितरकेँ समर्पित। तर्पण, शनि-राहु उपचार विशेष प्रभावी।
शुक्ल पक्षक 15म तिथि जखन सूर्य आ चन्द्र ठीक विपरीत (180°) होइत अछि। सबसँ उज्ज्वल रात्रि। सर्वाधिक शुभ तिथि मानल जाइत अछि।
सबसँ पूजनीय उपवास तिथि, भगवान विष्णुकेँ समर्पित। शुक्ल आ कृष्ण दुनू एकादशी कड़गर उपवाससँ मनाओल जाइत अछि।
भगवान गणेशकेँ समर्पित। शुक्ल चतुर्थी शुभ (विनायक चतुर्थी) आ कृष्ण चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी (मासिक गणेश व्रत) रूपमे मनाओल जाइत अछि।
भगवान शिवकेँ समर्पित। कृष्ण चतुर्दशी महा शिवरात्रि (शिवक महारात्रि) अछि, सबसँ महत्वपूर्ण हिन्दू उत्सवमे सँ एक।
क्षय तिथि तखन होइत अछि जखन चन्द्रमा एतबा तेज चलैत अछि जे 12° क पूरा खण्ड दू सूर्योदयक बीच पार भ' जाइत अछि।
उदाहरण: सूर्योदयपर तिथि 5 → अगिला सूर्योदयपर तिथि 7 (तिथि 6 क्षय!)
तिथि 6 दू सूर्योदयक बीच आरम्भ आ समाप्त भ' गेल – कोनो सूर्योदयपर नहि छल
वृद्धि तिथि तखन होइत अछि जखन चन्द्रमा एतबा धीरे चलैत अछि जे एक्के तिथि तीन सूर्योदयमे फैलि जाइत अछि।
उदाहरण: सूर्योदयपर तिथि 9 → अगिला सूर्योदयपर सेहो तिथि 9 (वृद्धि!)
चन्द्र एतबा धीरे चलल जे 12° पार करबामे दू सूर्योदय भ' गेल
जखन कोनो उत्सव वृद्धि (दोहरी) तिथिपर पड़ैत अछि, तखन दू दिनमे सँ कोन दिन पालन करू? एकादशीक लेल दोसर दिन। अन्य सब तिथिक लेल प्रथम दिन।
वृद्धि एकादशीमे दोसर दिन व्रत राखल जाइत अछि। एहि सँ व्रत द्वादशी पारण धरि सही रूपसँ फैलैत अछि।
गणेश चतुर्थी, शिवरात्रि, नवरात्रि आ अन्य सब उत्सवमे, वृद्धि तिथि होइतहुँ प्रथम दिन चुनल जाइत अछि।
शुभ मुहूर्त चयनमे तिथि प्राथमिक कारक छी। विभिन्न तिथि अपन वर्ग, देवता आ स्वभावक आधारपर भिन्न कार्यक लेल उपयुक्त अछि:
| कार्य | शुभ तिथि | त्याज्य | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| विवाह | 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 | 4, 8, 9, 14, Amavasya | भद्रा आ पूर्णा तिथि श्रेष्ठ |
| गृह प्रवेश | 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13 | 4, 8, 9, 14, Amavasya | विवाह समान; द्वितीया आ दशमी उत्कृष्ट |
| व्यापार आरम्भ | 1, 2, 3, 5, 6, 10, 11 | 4, 8, 9, 14 | नन्दा तिथि व्यापारमे आनन्द अनैत अछि |
| शिक्षा | 1, 2, 3, 5, 10, 11 | 4, 9, 14, Amavasya | पंचमी (सरस्वती) आदर्श |
| शल्यक्रिया | 4, 9, 14 | 8, Amavasya, Purnima | रिक्ता तिथि काटबाक/निकालबाक लेल |
| उपवास / व्रत | 11 (Ekadashi), Purnima, Amavasya, 4, 8 | - | एकादशी विष्णु लेल, चतुर्थी गणेश लेल |
| दान | Purnima, 5, 10, 11, 15 | 4, 9, 14 | पूर्णा तिथि पुण्य बढ़बैत अछि |