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सूर्य चालीसाक पाठ हिन्दू धर्ममे एकटा गम्भीर आध्यात्मिक अभ्यास अछि, जे सूर्य देवक आशीर्वाद प्राप्त करबाक लेल कयल जाइत अछि। एकर पाठ परम्परानुसार रविदिन (रविबार) कयल जाइत अछि, जे सूर्य देवकेँ समर्पित अछि, आ संक्रान्ति, रथ सप्तमी, आ छठि पूजा जकाँ पावन अवसरसभपर सेहो। अनेक भक्तगण एकर पाठ प्रतिदिन सूर्योदयक समय सेहो करैत छथि, प्रायः स्नान कएलाक बाद आ उगैत सूर्यकेँ जल (अर्घ्य) अर्पित कएलाक उपरान्त। ई चालीसा अनेक लाभ प्रदान करयवला मानल जाइत अछि, जाहिमे सुदृढ़ स्वास्थ्य, स्फूर्ति, आ रोगसभसँ—विशेषतः आँखि आ त्वचाकेँ प्रभावित करयवला रोगसभसँ—मुक्ति सम्मिलित अछि। ई आत्म-विश्वास, नेतृत्व गुण, आ जीवनमे समग्र सफलताकेँ बढ़ाबयवला मानल जाइत अछि, कारण सूर्य वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष) मे आत्मा (आत्मकारक) आ अहम्क प्रतिनिधित्व करैत छथि। भक्तगण एकर पाठ पैतृक आशीर्वाद प्राप्त करबाक लेल, बाधासभकेँ दूर करबाक लेल, आ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करबाक लेल करैत छथि। एकर नियमित पाठ—प्रायः ११, २१, ५१, वा १०८ बेर—मन, शरीर, आ आत्माकेँ शुद्ध करबाक लेल एकटा शक्तिशाली साधन मानल जाइत अछि, जे शान्ति, समृद्धि, आ आन्तरिक शक्ति पोषित करैत अछि।