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मध्याह्न काल (दोपहरक समय) गणेश चतुर्थी पूजाक लेल सबसँ शुभ समय अछि।
अहाँक स्थान खोजि रहल अछि...
दाहिना हाथक हथेलीमे तीन बेर जल लिय, प्रत्येक बेर विष्णु (केशव, नारायण, माधव) क नामक उच्चारण करैत आत्म-शुद्धिक लेल पान करू।
दाहिना हाथमे जल आ अक्षत लिय, पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश्यक घोषणा करू, फेर जल छोड़ि दिय।
भगवान गणेशक ध्यान करू – गज-मुख, चारि हाथवला, पाश, अंकुश, मोदक आ आशीर्वाद मुद्रा धारण कएने, कमल पर विराजमान, मूषक जिनकर वाहन अछि।
अक्षत आ फूल चढ़ाकय भगवान गणेशकेँ मूर्तिमे आवाहन करू, हुनका पूजाक लेल उपस्थित रहबाक लेल निवेदन करैत।
ॐ गं गणपतये नमः
oṃ gaṃ gaṇapataye namaḥ
विघ्नहर्ता भगवान् गणपति केँ नमन।
मूर्ति कें नीचाँ अक्षत राखि कय भगवान गणेशकेँ आसन प्रदान करू।
मूर्ति केर पैर पर फूल मिलाओल जल ढारि कए धोऊ।
भगवान गणेश केँ चन्दन, अक्षत आ फूल मिलाओल जल अञ्जुलि सँ अर्पित करू।
मूर्ति केँ पञ्चामृत (दूध, दही, घी, मधु, चीनी) सँ स्नान कराऊ, ओकर बाद शुद्ध जल सँ। धीरे-धीरे पोंछि कए फेर स्थापित करू।
मूर्ति केँ नव वस्त्र वा लाल/नारङ्गी रङ्गक वस्त्रक एकटा टुकड़ा अर्पित करू।
गणेश केँ यज्ञोपवीत (जनेऊ) मूर्ति पर राखि कए अर्पित करू।
मूर्ति पर चन्दन आ कुमकुम लगाउ।
गणेश जी केँ दूर्वा घास (३ वा ५ टा क समूह मे २१ टा पात) आ लाल फूल (अड़हुल) चढ़ाउ।
अगरबत्ती जराउ आ मूर्ति क सामने दक्षिणावर्त दिशा मे घुमाउ।
घी क दीप जराउ आ मूर्ति क सामने – पैर पर ३ बेर, नाभि पर २ बेर, मुँह पर १ बेर, फेर पूरा स्वरूप क चारू कात ७ बेर घुमाउ।
भगवान गणेश केँ २१ मोदक, फल, नारियल आ गुड़ चढ़ाउ। नैवेद्य क चारू कात जल छिड़कू आ नैवेद्य मन्त्र क जप करू।
भगवान् गणेशकेँ ताम्बूलक रूपमे पानक पात आ सुपारी अर्पित करू।
गणेश बीज मन्त्रक जप करैत काल दक्षिणावर्त दिशामे विग्रहक ३ बेर परिक्रमा करू।
ॐ गं गणपतये नमः
oṃ gaṃ gaṇapataye namaḥ
विघ्नहर्ता भगवान् गणपति केँ नमन।
दुनू हाथमे फूल लिय, मन्त्र पुष्पाञ्जलिक पाठ करू, आ भगवान् गणेशक चरणमे फूलकेँ अर्पित करू। एहि सँ औपचारिक पूजा सम्पन्न होइत अछि।
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्। ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥
oṃ gaṇānāṃ tvā gaṇapatiṃ havāmahe kaviṃ kavīnāmupamaśravastamam | jyeṣṭharājaṃ brahmaṇāṃ brahmaṇaspata ā naḥ śṛṇvannūtibhiḥ sīda sādanam ||
हम अहाँकेँ आह्वान करैत छी, गणक स्वामी, ज्ञानीसभमे ज्ञानी, महिमामे सर्वोच्च। हे प्रार्थनाक ज्येष्ठ राजा, पवित्र वाणीक स्वामी – हमर आह्वान सुनू आ हमरा सभक बीच अपन स्थान ग्रहण करू।