भाई दूज 2027
भाई दूज 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
रविवार, 31 अक्टूबर 2027
भाई दूज 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:32 AM | 5:37 PM |
| मुंबई | 6:38 AM | 6:05 PM |
| बेंगलुरु | 6:12 AM | 5:53 PM |
| चेन्नई | 6:02 AM | 5:42 PM |
| कोलकाता | 5:40 AM | 4:59 PM |
| पुणे | 6:33 AM | 6:02 PM |
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यह तिथि क्यों?
Bhai Dooj उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
तैयारी
भाई और बहन दोनों स्नान करके नए वस्त्र पहनें। बहन आरती की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, फूल और नारियल सजाए। पूजा स्थ...
- 2
आसन एवं आवाहन
भाई पूर्वमुखी होकर स्वच्छ आसन पर बैठें। बहन उनके सामने बैठें। दीपक जलाएँ और यम-यमुना का आशीर्वाद माँगें, इस दिन यमुना द्...
- 3
तिलक लगाना
बहन अनामिका (रिंग फिंगर) से भाई के मस्तक पर रोली (कुमकुम) का तिलक लगाए। फिर तिलक पर अक्षत (चावल) रखें। भाई के सिर पर फूल...
फल (लाभ)
भाई दूज से भाई पर यम की कृपा होती है, जो दीर्घायु और अकाल मृत्यु से मुक्ति सुनिश्चित करती है। बहन को यमुना पूजा के समान पुण्य मिलता है। भाई-बहन का बन्धन जन्म-जन्मान्तर के लिए पवित्र और दृढ़ होता है।
देवता
यमराज, यमुना
कथा एवं इतिहास
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। ए...पूरी कथा पढ़ें →
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। एक अन्य परम्परा कृष्ण-सुभद्रा मिलन से जुड़ी है।
कैसे मनाएँ
बहनें भाई के मस्तक पर कुमकुम, चावल और चन्दन का तिलक लगाएँ, आरती करें और दीर्घायु की कामना करें। भाई उपहार और मिठाइयाँ दें। विशेष पकवान बनाएँ।
महत्व
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र बन्धन का उत्सव है। यह दीपावली का पाँचवाँ और अन्तिम दिन है। बहन का आशीर्वाद यम को भी दूर रखने में समर्थ माना जाता है।