धनतेरस 2025
धनतेरस 2025 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
Dhanteras Puja (Pradosh Kaal) (दिल्ली)
6:04 PM – 7:30 PM
धनतेरस 2025 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:23 AM | 5:48 PM | 6:04 PM – 7:30 PM |
| मुंबई | 6:33 AM | 6:13 PM | 6:29 PM – 7:55 PM |
| बेंगलुरु | 6:10 AM | 5:59 PM | 6:15 PM – 7:41 PM |
| चेन्नई | 5:59 AM | 5:48 PM | 6:04 PM – 7:30 PM |
| कोलकाता | 5:34 AM | 5:08 PM | 5:25 PM – 6:51 PM |
| पुणे | 6:29 AM | 6:09 PM | 6:26 PM – 7:52 PM |
विस्तृत स्थानीय समय, पूजा विधि व सामग्री सूची के लिए किसी भी शहर पर क्लिक करें
यह तिथि क्यों?
प्रदोष (सन्ध्या) नियम: जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। सन्ध्या को धन्वन्तरि और कुबेर की पूजा।
तिथि निर्धारण नियम
प्रदोष काल (सन्ध्या समय) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। यह दीपावली और धनतेरस जैसे त्योहारों का प्रमुख नियम है।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- नया सोना/चाँदी का सामान या धातु का बर्तन
- दीपक (मिट्टी के)(13)
- धतूरे के फूल और फल
- सिक्के (पुराने और नए)
- कुमकुम (सिन्दूर)
पूजा के चरण
- 1
धातु की खरीदारी
पूजा से पहले, नया सोना या चाँदी का सामान, या कम से कम स्टील/पीतल का बर्तन खरीदें। यह खरीदारी घर में धन के आगमन का प्रतीक...
- 2
घर की सफाई और तैयारी
पूरे घर की सफाई करें, विशेषतः पूजा स्थल और मुख्य प्रवेश द्वार। पूजा चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएँ। धन्वन्तरि और लक्ष्मी चित्र...
- 3
आचमन एवं संकल्प
शुद्धि के लिए तीन बार जल का आचमन करें। दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें।
फल (लाभ)
अकाल मृत्यु से रक्षा (अपमृत्यु निवारण), धन्वन्तरि द्वारा उत्तम स्वास्थ्य प्रदान, लक्ष्मी द्वारा धन-समृद्धि का आकर्षण, दिवाली उत्सव का शुभारम्भ, और घर की सभी धातुओं और मूल्यवान वस्तुओं का शुद्धिकरण
देवता
भगवान धन्वन्तरि, देवी लक्ष्मी, कुबेर
कथा एवं इतिहास
धनतेरस पर समुद्र मन्थन से भगवान धन्वन्तरि (विष्णु अवतार) अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए। इसी दिन लक्ष्मी भी सागर से प्रकट हुईं। एक अन्य कथा में हिमा ने सोने-चाँदी के सिक्के और दीप जलाकर यमराज को ...पूरी कथा पढ़ें →
धनतेरस पर समुद्र मन्थन से भगवान धन्वन्तरि (विष्णु अवतार) अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए। इसी दिन लक्ष्मी भी सागर से प्रकट हुईं। एक अन्य कथा में हिमा ने सोने-चाँदी के सिक्के और दीप जलाकर यमराज को चकाचौंध कर अपने पति को बचाया।
कैसे मनाएँ
सोना, चाँदी, बर्तन या घर के नए सामान खरीदें – खरीदारी का सबसे शुभ दिन। शाम को दक्षिण दिशा में तेरह दीप जलाएँ। स्वास्थ्य के लिए धन्वन्तरि और धन के लिए लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करें।
महत्व
धनतेरस दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है। "धन" का अर्थ सम्पत्ति और "तेरस" त्रयोदशी। यह स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का उत्सव है।