होली 2026
होली 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
मंगलवार, 3 मार्च 2026
होली 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:44 AM | 6:22 PM |
| मुंबई | 6:56 AM | 6:44 PM |
| बेंगलुरु | 6:34 AM | 6:28 PM |
| चेन्नई | 6:23 AM | 6:18 PM |
| कोलकाता | 5:56 AM | 5:40 PM |
| पुणे | 6:52 AM | 6:41 PM |
विस्तृत स्थानीय समय, पूजा विधि व सामग्री सूची के लिए किसी भी शहर पर क्लिक करें
यह तिथि क्यों?
Holi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- गोबर के उपले(10-15)
- लकड़ी के लट्ठे
- साबुत नारियल(1)
- नई फसल का गेहूँ
- नई फसल का जौ
पूजा के चरण
- 1
होलिका चिता निर्माण
गोबर के उपले, लकड़ी के लट्ठे और सूखी टहनियाँ इकट्ठी करें। खुले मैदान में चिता बनाएँ, बीच में एक लकड़ी का खम्भा रखें जो प...
- 2
पूजा स्थापना
चिता के पास जल का लोटा रखें। थाली में कुमकुम, अक्षत, फूल, नारियल और अन्य सामग्री सजाएँ।
- 3
संकल्प
दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर, तिथि, स्थान और होलिका दहन का उद्देश्य बोलकर जल छोड़ें।
फल (लाभ)
सभी अशुभ और नकारात्मकता का विनाश (जैसे होलिका जलाई गई), आसुरी शक्तियों से रक्षा, वातावरण की शुद्धि, अत्याचार पर भक्ति की विजय का उत्सव, और आनन्द व भाईचारे से वसन्त ऋतु का स्वागत
देवता
भगवान विष्णु (प्रह्लाद के रक्षक)
कथा एवं इतिहास
दैत्य राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति के लिए मारने का प्रयास किया। उसकी बहन होलिका, जिसे अग्नि से प्रतिरक्षा का वरदान था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। पर वरदान क...पूरी कथा पढ़ें →
दैत्य राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति के लिए मारने का प्रयास किया। उसकी बहन होलिका, जिसे अग्नि से प्रतिरक्षा का वरदान था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। पर वरदान केवल अकेले बैठने पर काम करता था – होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया।
कैसे मनाएँ
पूर्व संध्या: होलिका दहन – अलाव जलाएँ, परिक्रमा करें। अगले दिन: रंगों से खेलें (गुलाल, पिचकारी), ठण्डाई पिएँ, गुजिया खाएँ। मित्रों और परिवार से मिलें।
महत्व
अच्छाई (प्रह्लाद की भक्ति) की बुराई (हिरण्यकशिपु के अहंकार) पर विजय। वसन्त, नवीनता और सामाजिक एकता का उत्सव।