अलवर · Rajasthan
महाशिवरात्रि 2025अलवर में
अलवर के निर्देशांकों (27.55°N, 76.63°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
बुधवार, 26 फ़रवरी 2025
Nishita Kaal Puja
00:10 – 01:00
सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
18:22
यह तिथि क्यों?
निशीथ काल (मध्यरात्रि) नियम: जिस दिन चतुर्दशी तिथि निशीथ काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। शिव मध्यरात्रि में प्रकट हुए।
तिथि निर्धारण नियम
निशीथ काल (मध्यरात्रि) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
व्रत संकल्प और तैयारी
प्रातःकाल से उपवास आरम्भ करें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिवलिंग पर शिवरात्रि व्रत का औपचारिक संकल्प लें।
- 2
आचमन और प्राणायाम
शुद्धि के लिए आचमन करें, उसके बाद मन शान्त करने के लिए तीन बार प्राणायाम करें।
- 3
ध्यान (शिव पर)
भगवान शिव का ध्यान करें – त्रिनेत्र, चन्द्रमौलि, नीलकण्ठ, त्रिशूल, डमरू और वरदमुद्रा धारी, कैलाश पर्वत पर नन्दी सहित व...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति), संचित पापों का पूर्ण नाश (पापनाशन), शिव की प्रत्यक्ष कृपा और दर्शन, सभी धार्मिक मनोकामनाओं की पूर्ति, और आध्यात्मिक जागृति
गणना प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
भगवान शिव
कथा एवं इतिहास
इस रात्रि से अनेक कथाएँ जुड़ी हैं: शिव ने ताण्डव नृत्य किया – सृष्टि और विनाश का ब्रह्माण्डीय नृत्य। समुद्र मन्थन में विश्व को बचाने के लिए शिव ने हलाहल विष पिया, जिससे उनका कण्ठ नीला हो गया (नीलकण्...पूरी कथा पढ़ें →
इस रात्रि से अनेक कथाएँ जुड़ी हैं: शिव ने ताण्डव नृत्य किया – सृष्टि और विनाश का ब्रह्माण्डीय नृत्य। समुद्र मन्थन में विश्व को बचाने के लिए शिव ने हलाहल विष पिया, जिससे उनका कण्ठ नीला हो गया (नीलकण्ठ)।
कैसे मनाएँ
कठोर उपवास रखें (निर्जला या फलाहार)। रात भर जागें (जागरण)। चार प्रहरों में शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, जल और शहद चढ़ाएँ। "ओम नमः शिवाय" का जाप करें।
महत्व
वर्ष की सबसे अन्धकारमय रात्रि – अन्धकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक। इस रात्रि शिव की ऊर्जा सर्वाधिक सुलभ मानी जाती है।
व्रत
कठोर व्रत (निर्जला या केवल फलाहार)। अगली सुबह पूजा के बाद पारण करें।