रामनवमी 2025
रामनवमी 2025 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
रविवार, 6 अप्रैल 2025
Ram Navami Puja (Madhyahna) (दिल्ली)
11:08 AM – 1:39 PM
रामनवमी 2025 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:05 AM | 6:41 PM | 11:08 AM – 1:39 PM |
| मुंबई | 6:28 AM | 6:53 PM | 11:26 AM – 1:55 PM |
| बेंगलुरु | 6:12 AM | 6:31 PM | 11:08 AM – 1:35 PM |
| चेन्नई | 6:01 AM | 6:20 PM | 10:57 AM – 1:25 PM |
| कोलकाता | 5:25 AM | 5:53 PM | 12:48 AM – 10:29 PM |
| पुणे | 6:24 AM | 6:49 PM | 11:22 AM – 1:51 PM |
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यह तिथि क्यों?
मध्याह्न नियम: जिस दिन नवमी तिथि मध्याह्न काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। भगवान राम का जन्म मध्याह्न (अभिजित मुहूर्त) में हुआ।
तिथि निर्धारण नियम
मध्याह्न (दोपहर) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। राम नवमी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- राम मूर्ति/चित्र (सीता, लक्ष्मण, हनुमान सहित)
- तुलसी के पत्ते
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- लाल और पीले फूल
- ताजे फल
पूजा के चरण
- 1
प्रातः स्नान व शुद्धि
प्रातः उठकर गंगा जल (उपलब्ध हो तो) से पवित्र स्नान करें। स्वच्छ पीले या केसरिया वस्त्र पहनें। मध्याह्न (दोपहर) पूजा तक व...
- 2
कलश स्थापना
ताम्र या पीतल के कलश में जल भरें, ऊपर 5 आम के पत्ते और एक साबुत नारियल रखें। कलश पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएँ। यह सभी पवि...
- 3
राम मूर्ति स्थापना
राम मूर्ति या चित्र (आदर्शतः सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित) को पूर्व दिशा की ओर स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। नीचे पीला वस...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
धर्म और सदाचार की प्राप्ति, साहस और नैतिक बल, अशुभ से रक्षा, पारिवारिक सामंजस्य, और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम – आदर्श राजा, पति, पुत्र और मनुष्य – का सर्वोच्च आशीर्वाद
देवता
भगवान राम
कथा एवं इतिहास
भगवान विष्णु ने चैत्र शुक्ल नवमी को राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र राम के रूप में अयोध्या में अवतार लिया। मध्याह्न में जन्मे राम धर्म के मूर्तिमान रूप हैं।
कैसे मनाएँ
मध्याह्न तक उपवास, फिर फलाहार या भोजन। रामायण पाठ करें (विशेषतः सुन्दरकाण्ड)। राम पूजा करें। "श्री राम जय राम जय जय राम" का जाप करें।
महत्व
मर्यादा पुरुषोत्तम के जन्म का उत्सव – जिन्होंने प्रत्येक कदम पर धर्म का पालन किया।
व्रत
मध्याह्न तक उपवास। फलाहार और सात्विक भोजन से पारण करें।