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वासीयोगः
निर्माण नियम
सूर्य से 12वें भाव में ग्रह (चन्द्र नहीं)
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
वासी योग तब बनता है जब चन्द्र को छोड़कर कोई ग्रह सूर्य से 12वें भाव में हो। यह सूर्य का "पिछला रक्षक" बनाता है, पूर्वजन्म समर्थन और आध्यात्मिक गहराई प्रदान करता है।
छिपा समर्थन
पूर्वजन्म पुण्य वर्तमान सफलता का समर्थन, दानशील स्वभाव, आध्यात्मिक गहराई।
वासि योग वाले व्यक्ति प्रायः ऐसी सफलता का अनुभव करते हैं जो अदृश्य शक्तियों या समय पर मिली सहायता से उत्पन्न होती प्रतीत होती है, जो पूर्वजन्म के पुण्यों का संकेत देती है। वे सामान्यतः एक परोपकारी और दयालु स्वभाव प्रदर्शित करते हैं, दूसरों के कल्याण में योगदान करके संतुष्टि प्राप्त करते हैं। इससे सेवा या आध्यात्मिक मार्गदर्शन से जुड़े करियर पथों का निर्माण हो सकता है, जो एक शांत आंतरिक शक्ति और लचीलेपन को बढ़ावा देता है। वे गुप्त संसाधनों और आध्यात्मिक गहराई के मूल्य को पहचानते हैं।
वासि योग के परिणाम सामान्यतः सूर्य की दशा अथवा अन्तर्दशा काल में, अथवा सूर्य से द्वादश भाव में स्थित ग्रह की दशा-अन्तर्दशा में प्रकट होते हैं। ये समय गुप्त सहयोग और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों को सक्रिय करते हैं।