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वेशीयोगः
निर्माण नियम
सूर्य से 2वें भाव में ग्रह (चन्द्र नहीं)
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
वेशी योग तब बनता है जब चन्द्र को छोड़कर कोई ग्रह सूर्य से 2वें भाव में हो। यह सूर्य का "अगला रक्षक" बनाता है, जातक के अधिकार, धन संचय और सार्वजनिक छवि को बढ़ाता है।
प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि कौन सा ग्रह है। शुभ ग्रह: शुभ वेशी (धन, यश)। पाप ग्रह: अशुभ वेशी (अधिकार और वित्त में चुनौतियाँ)।
अधिकार और धन
बढ़ा हुआ अधिकार, धन संचय क्षमता और सकारात्मक सार्वजनिक छवि।
वेशी योग वाले व्यक्ति प्रायः सम्मान प्राप्त करने और संसाधनों को संचित करने की स्वाभाविक क्षमता प्रदर्शित करते हैं, और स्वयं को प्रभावशाली पदों पर पाते हैं। उनकी सार्वजनिक छवि सामान्यतः अच्छी मानी जाती है, जो करियर की उन्नति और वित्तीय स्थिरता में योगदान करती है। सूर्य से द्वितीय भाव में स्थित विशिष्ट ग्रह इन अभिव्यक्तियों को प्रभावित करेगा, जिससे इन क्षेत्रों में या तो सुचारु प्रगति होगी या चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी।
वेशी योग के प्रभाव सामान्यतः सूर्य की दशा या अन्तर्दशा काल में, अथवा सूर्य से द्वितीय भाव में स्थित ग्रह की दशा/अन्तर्दशा में प्रकट होते हैं। ये अवधियाँ प्रायः अधिकार वृद्धि और आर्थिक लाभ के अवसर लाती हैं।