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Naming Ceremony Muhurat
2026 में अपने शिशु के नामकरण संस्कार के लिए सबसे शुभ तिथि खोजें। जन्म नक्षत्र के अक्षरों पर आधारित नाम वैदिक परम्परा में आजीवन महत्व रखता है।
हमारा AI-संचालित इंजन आपकी विशिष्ट गतिविधि के लिए पंचांग, गोचर, होरा और चौघड़िया के आधार पर समय खंडों को 0-100 अंक देता है।
सर्वोत्तम मुहूर्त खोजेंपारम्परिक वैदिक मुहूर्त नियमों पर आधारित – अनुकूल नक्षत्र, तिथि, वार और ग्रह स्थिति।
20 अप्रैल (सोम) – शुक्ल सप्तमी, पुनर्वसु नक्षत्र
6 मई (बुध) – शुक्ल दशमी, हस्त नक्षत्र
4 जून (गुरु) – शुक्ल नवमी, श्रवण नक्षत्र
21 सितम्बर (सोम) – शुक्ल दशमी, रोहिणी नक्षत्र
16 नवम्बर (सोम) – शुक्ल एकादशी, अनुराधा नक्षत्र
नोट: ये तिथियां अनुमानित हैं। व्यक्तिगत, स्थान-विशिष्ट सिफारिशों के लिए हमारा मुहूर्त AI टूल उपयोग करें।
वैदिक ग्रन्थों और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार ध्यान देने योग्य बातें।
नामकरण पारम्परिक रूप से जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है, हालांकि यह पहले जन्मदिन तक किया जा सकता है।
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाती, अनुराधा, श्रवण और रेवती शुभ नक्षत्र हैं।
नाम का पहला अक्षर जन्म नक्षत्र के निर्धारित अक्षरों से मिलना चाहिए।
सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार अनुकूल वार हैं।
सबसे शुभ परिणामों के लिए शुक्ल पक्ष में समारोह करना चाहिए।
2026 में अन्नप्राशन (पहला अन्न) संस्कार के लिए शुभ तिथियां खोजें। यह वैदिक संस्कार शिशु के दूध से ठोस आहार की ओर संक्रमण को चिह्नित करता है।
मुहूर्त चयन के बारे में और जानें2026 में अपने बच्चे के मुंडन (चूड़ाकरण) संस्कार के लिए सबसे शुभ तिथि खोजें। यह महत्वपूर्ण वैदिक संस्कार स्वास्थ्य, दीर्घायु और शुद्धि के लिए किया जाता है।
मुहूर्त चयन के बारे में और जानें2026 में उपनयन (पवित्र जनेऊ संस्कार) के लिए शुभ तिथियां खोजें। यह महत्वपूर्ण वैदिक संस्कार बच्चे को वैदिक अध्ययन में दीक्षित करता है।
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