Loading...
Loading...
आज गुरुवार को उज्जैन के लिए शुभ और अशुभ समय। अभिजित मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल, राहु काल, यमगण्ड और अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्तों का विवरण।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 4:31 AM – 5:19 AM |
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 PM – 12:53 PM |
| अमृत काल | 7:02 PM – 8:44 PM |
| काल | समय |
|---|---|
| राहु काल | 2:03 PM – 3:38 PM |
| यमगण्ड | 6:07 AM – 7:42 AM |
| गुलिक काल | 9:17 AM – 10:53 AM |
| वर्ज्यम् | 5:02 AM – 6:44 AM |
| दुर्मुहूर्त | 10:21 AM – 11:12 AM |
| दुर्मुहूर्त | 3:26 PM – 4:16 PM |
वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक दिन कुछ समय शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं। ये समय सूर्योदय, सूर्यास्त, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के आधार पर गणना किए जाते हैं। शुभ मुहूर्त में नए कार्य, पूजा, और महत्वपूर्ण निर्णय लेने चाहिए। अशुभ काल में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
अभिजित मुहूर्त दिन का 8वाँ मुहूर्त है, जो मध्याह्न के आसपास आता है। इसका नाम 28वें नक्षत्र अभिजित (वेगा तारा) के नाम पर है। यह विजय का मुहूर्त माना जाता है और सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम है। ध्यान दें कि बुधवार को अभिजित मुहूर्त शुभ नहीं माना जाता।
ये तीन प्रमुख अशुभ काल हैं जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 भागों में विभाजित करके निकाले जाते हैं। राहु काल सबसे अशुभ माना जाता है — इसमें नए कार्य, अनुबंध और यात्रा वर्जित हैं। यमगण्ड यम (मृत्यु देव) से संबंधित है और यात्रा के लिए विशेष रूप से प्रतिकूल है। गुलिक काल शनि-पुत्र गुलिक द्वारा शासित है।
वर्ज्यम् और अमृत काल नक्षत्र-आधारित समय खण्ड हैं। प्रत्येक नक्षत्र में एक विशिष्ट घटी-खण्ड वर्ज्य (निषिद्ध) होता है और एक अमृत (अत्यन्त शुभ) होता है। वर्ज्यम् में शुभ कार्य वर्जित हैं, जबकि अमृत काल दिन का सबसे शुभ समय है — नए कार्य, पूजा और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए आदर्श।
ग्रहों की अनुकूल स्थिति में शुभ काल – इन अवधियों में नए कार्य, समारोह और महत्वपूर्ण कार्य प्रारम्भ करें।