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शुक्ल द्वितीया ब्रह्मा द्वारा शासित होती है, जो सृष्टिकर्ता देवता हैं, ज्ञान, बुद्धि और नींव की स्थापना का प्रतीक हैं। यह तिथि आधारशिला रखने, शैक्षिक कार्य शुरू करने और रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न होने के लिए शुभ मानी जाती है। यह नए विचारों और रिश्तों के विकास का समर्थन करती है। एक उल्लेखनीय अनुष्ठान भाऊ बीज या यम द्वितीया है, जहाँ बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं।
शुक्ल द्वितीया पर, जो ब्रह्मा से संबंधित है, बौद्धिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें। शैक्षिक अध्ययन, गृहप्रवेश समारोह, या कलात्मक परियोजनाएं शुरू करना शुभ होता है। दूध और फलों पर उपवास करना लाभकारी होता है। तर्क-वितर्क करने, बड़े निर्माण कार्य शुरू करने, या कानूनी लड़ाई शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें बाधाएँ आ सकती हैं। शराब, मांस, या तीखे भोजन का सेवन करने से बचें। ज्ञान के लिए 'ॐ ब्रह्मणे नमः' या सरस्वती मंत्र जैसे 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः' का जाप करना चाहिए। दान में आमतौर पर छात्रों को किताबें, शैक्षिक सामग्री, या विद्वानों और ब्राह्मणों को सफेद वस्त्र दान करना शामिल है, जो ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
बुधवार का स्वामी बुध (Budha) है, जो बुद्धि, संचार और व्यावसायिक कौशल का प्रतीक है। इसका स्वभाव अनुकूलनीय, मजाकिया और विश्लेषणात्मक है, जो शिक्षा और व्यापार को प्रभावित करता है। यह दिन नई पढ़ाई शुरू करने, अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने, व्यावसायिक लेनदेन और बौद्धिक कार्यों के लिए अत्यधिक शुभ होता है। यह आमतौर पर संचार, लेखन और यात्रा के लिए अनुकूल होता है। भक्त अक्सर बुधवार को भगवान विष्णु या विठोबा की पूजा करते हैं, ज्ञान, समृद्धि और प्रयासों में सफलता की कामना करते हैं। हरी मूंग चढ़ाना या विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranama) का पाठ करना आशीर्वाद के लिए सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में बुधवार, 11 नवंबर 2026 को तिथि द्वितीया, नक्षत्र अनुराधा, योग अतिगण्ड और करण कौलव है। सूर्योदय 06:37, सूर्यास्त 17:43। राहु काल 12:10 से 13:33, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | द्वितीया |
| नक्षत्र | अनुराधा |
| योग | अतिगण्ड |
| करण | कौलव |
| वार | बुधवार |
| सूर्योदय | 06:37 |
| सूर्यास्त | 17:43 |
| राहु काल | 12:10 – 13:33 |
| अभिजित मुहूर्त | 11:48 – 12:32 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।