भाई दूज 2026
भाई दूज 2026 का पर्व बुधवार, बुधवार, 11 नवंबर 2026. तिथि: kartika shukla 2.
भाई दूज 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
बुधवार, 11 नवंबर 2026
2026 पंचांग संदर्भ
वार
बुधवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
इस वर्ष भाई दूज बुधवार को पड़ रहा है, 2025 (2025-10-23) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Wednesday gives the day a Budha emphasis — learning-related rites and green offerings carry extra weight, traditionally favourable for new study.
The 2025 observance fell on Thursday, 2025-10-23 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2027, Bhai Dooj will fall on Sunday, 2027-10-31 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Bhai Dooj 2026
On Wednesday, November 11, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:40 IST and sunset at 17:29 IST — a daylight span of 10h 49m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:46 (Kolkata) at the eastern edge to 06:43 (Mumbai) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Bhai Dooj 2026, the central rite of अपराह्न depends on the Kartika Shukla 2 being present during that window on 2026-11-11 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
भाई दूज 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:40 AM | 5:29 PM |
| मुंबई | 6:43 AM | 6:01 PM |
| बेंगलुरु | 6:16 AM | 5:50 PM |
| चेन्नई | 6:05 AM | 5:39 PM |
| कोलकाता | 5:46 AM | 4:54 PM |
| पुणे | 6:38 AM | 5:58 PM |
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भाई दूज 2026 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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भाई दूज — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- बहन अपराह्न काल (दोपहर लगभग १:३०-४ बजे) में भाई के माथे पर तिलक लगाए।
- बहन भाई के लिए भोजन तैयार करे — एक व्यञ्जन भी पर्याप्त है।
- भाई उपहार, धन, अथवा आजीवन रक्षा का वचन दे।
- यम-यमुना कथा का स्मरण करें — पर्व का पौराणिक आधार।
न करें
- भाई आज अपने घर भोजन न करें — बहन के घर भोजन परम्परा है।
- एक दूसरे के साथ व्यापारिक लेनदेन अथवा बड़े आर्थिक कार्य न करें।
- आलोचना अथवा कलह से बचें — पर्व सम्बन्धों के पुनःसुदृढ़ीकरण का है।
- आज कोई अशुभ अथवा शोक से सम्बद्ध विधि न करें।
भाई दूज 2026 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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यम-यमुना का दिन। आज जो तिलक आपकी बहन ने आपके माथे पर लगाया, वह आगामी वर्ष की सबसे कठिन घड़ी से आपकी रक्षा करे। भाई दूज की शुभकामनाएँ।
दीपावली के दो दिन बाद, दीप अभी जल रहे हैं, बहन आपको थाली देती है। यही भाई दूज है। उसे सहेजें।
आज का यह बन्धन उस हर दूरी से अधिक टिकाऊ हो जो आप दोनों तय करेंगे। शुभ भाई दूज।
यम, यमुना, एवं आप। दीपावली के तीन दिन बाद, छोटा बन्धन पुनः स्थापित होता है। आज आप जिस ओर भी हों, उसकी कामना।
आज जो बहन आपको भोजन कराए, उन पर एक ऋण है। आपको ऐसा भाई-बहन का खाता मिले जो कभी न बन्द हो। शुभ भाई दूज।
पञ्च-दिवसीय दीपावली पर्व — पर्व क्रम
दीपावली के पाँच दिन धनतेरस से प्रारम्भ होकर भाई दूज तक चलते हैं — प्रत्येक दिन का अपना देवता, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय केन्द्रबिन्दु है।
भाई दूज वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
यह तिथि क्यों?
Bhai Dooj अपराह्न नियम का पालन करता है। त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब तिथि अपराह्न की अवधि में व्याप्त हो। जब तिथि दो दिनों में फैलती है तो धर्मसिन्धु के नियमों से सही तिथि निर्धारित होती है।
तिथि निर्धारण नियम
अपराह्न (दोपहर बाद) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। दशहरा जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु – शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
तैयारी
भाई और बहन दोनों स्नान करके नए वस्त्र पहनें। बहन आरती की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, फूल और नारियल सजाए। पूजा स्थ...
- 2
आसन एवं आवाहन
भाई पूर्वमुखी होकर स्वच्छ आसन पर बैठें। बहन उनके सामने बैठें। दीपक जलाएँ और यम-यमुना का आशीर्वाद माँगें, इस दिन यमुना द्...
- 3
तिलक लगाना
बहन अनामिका (रिंग फिंगर) से भाई के मस्तक पर रोली (कुमकुम) का तिलक लगाए। फिर तिलक पर अक्षत (चावल) रखें। भाई के सिर पर फूल...
फल (लाभ)
भाई दूज से भाई पर यम की कृपा होती है, जो दीर्घायु और अकाल मृत्यु से मुक्ति सुनिश्चित करती है। बहन को यमुना पूजा के समान पुण्य मिलता है। भाई-बहन का बन्धन जन्म-जन्मान्तर के लिए पवित्र और दृढ़ होता है।
देवता
यमराज, यमुना
कथा एवं इतिहास
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। ए… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। एक अन्य परम्परा कृष्ण-सुभद्रा मिलन से जुड़ी है।
कैसे मनाएँ
बहनें भाई के मस्तक पर कुमकुम, चावल और चन्दन का तिलक लगाएँ, आरती करें और दीर्घायु की कामना करें। भाई उपहार और मिठाइयाँ दें। विशेष पकवान बनाएँ।
महत्व
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र बन्धन का उत्सव है। यह दीपावली का पाँचवाँ और अन्तिम दिन है। बहन का आशीर्वाद यम को भी दूर रखने में समर्थ माना जाता है।
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