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शुक्ल द्वितीया ब्रह्मा द्वारा शासित होती है, जो सृष्टिकर्ता देवता हैं, ज्ञान, बुद्धि और नींव की स्थापना का प्रतीक हैं। यह तिथि आधारशिला रखने, शैक्षिक कार्य शुरू करने और रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न होने के लिए शुभ मानी जाती है। यह नए विचारों और रिश्तों के विकास का समर्थन करती है। एक उल्लेखनीय अनुष्ठान भाऊ बीज या यम द्वितीया है, जहाँ बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं, जिससे पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं।
शुक्ल द्वितीया पर, जो ब्रह्मा से संबंधित है, बौद्धिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें। शैक्षिक अध्ययन, गृहप्रवेश समारोह, या कलात्मक परियोजनाएं शुरू करना शुभ होता है। दूध और फलों पर उपवास करना लाभकारी होता है। तर्क-वितर्क करने, बड़े निर्माण कार्य शुरू करने, या कानूनी लड़ाई शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें बाधाएँ आ सकती हैं। शराब, मांस, या तीखे भोजन का सेवन करने से बचें। ज्ञान के लिए 'ॐ ब्रह्मणे नमः' या सरस्वती मंत्र जैसे 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः' का जाप करना चाहिए। दान में आमतौर पर छात्रों को किताबें, शैक्षिक सामग्री, या विद्वानों और ब्राह्मणों को सफेद वस्त्र दान करना शामिल है, जो ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
शनिवार का स्वामी शनि (Shani) है, जो अनुशासन, कर्म और दीर्घायु का प्रतिनिधित्व करता है। इसका स्वभाव गंभीर, धैर्यवान और कर्म-संबंधी है, जो कड़ी मेहनत और न्याय को प्रभावित करता है। यह दिन दीर्घकालिक योजना, आध्यात्मिक अनुशासन और धर्मार्थ कार्यों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए अनुकूल होता है, लेकिन अक्सर नए उद्यम शुरू करने या यात्रा के लिए कम शुभ माना जाता है। भक्त भगवान शनि की पूजा करते हैं ताकि साढ़े साती (Sade Sati) जैसे चुनौतीपूर्ण प्रभावों को कम किया जा सके, अक्सर सुरक्षा और शक्ति के लिए हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। उपवास और काले तिल या तेल चढ़ाना सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शनिवार, 9 जनवरी 2027 को तिथि द्वितीया, नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग हर्षण और करण बालव है। सूर्योदय 07:09, सूर्यास्त 17:57। राहु काल 09:51 से 11:12, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | द्वितीया |
| नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा |
| योग | हर्षण |
| करण | बालव |
| वार | शनिवार |
| सूर्योदय | 07:09 |
| सूर्यास्त | 17:57 |
| राहु काल | 09:51 – 11:12 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:12 – 12:55 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।