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कृष्ण एकादशी विष्णु को समर्पित है, जो संरक्षक हैं, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और पोषण का प्रतीक हैं। यह तिथि आध्यात्मिक प्रथाओं, उपवास और गहन भक्ति के लिए अत्यंत शुभ है, विशेष रूप से शुद्धि और पैतृक आशीर्वाद के लिए। प्राथमिक अनुष्ठान एकादशी व्रत है, जहाँ भक्त अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं, पापों को धोने और आध्यात्मिक योग्यता प्राप्त करने के लिए विष्णु पर ध्यान करते हैं, अक्सर मुक्ति पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
कृष्ण एकादशी, भगवान विष्णु को समर्पित है, आध्यात्मिक शुद्धि के लिए एक अत्यंत शुभ दिन है। भक्त कठोर उपवास रखते हैं, या तो निर्जला (पानी के बिना) या फलाहार (केवल फल), अनाज, दालों और चावल से परहेज करते हुए। विष्णु सहस्रनाम या भगवद गीता का पाठ करना अत्यधिक अनुशंसित है। आध्यात्मिक दीक्षा और गहन ध्यान के लिए यह शुभ है। अनाज, प्याज, लहसुन, या मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचें। दाढ़ी न बनाएँ, नाखून न काटें, या सांसारिक सुखों में लिप्त न हों। शक्तिशाली मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए। दान में वैष्णव ब्राह्मणों या मंदिरों को अनाज (द्वादशी पर उपवास तोड़ने के बाद), वस्त्र, या धन अर्पित करना शामिल है।
शनिवार का स्वामी शनि (Shani) है, जो अनुशासन, कर्म और दीर्घायु का प्रतिनिधित्व करता है। इसका स्वभाव गंभीर, धैर्यवान और कर्म-संबंधी है, जो कड़ी मेहनत और न्याय को प्रभावित करता है। यह दिन दीर्घकालिक योजना, आध्यात्मिक अनुशासन और धर्मार्थ कार्यों के लिए शुभ होता है। यह आमतौर पर धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए अनुकूल होता है, लेकिन अक्सर नए उद्यम शुरू करने या यात्रा के लिए कम शुभ माना जाता है। भक्त भगवान शनि की पूजा करते हैं ताकि साढ़े साती (Sade Sati) जैसे चुनौतीपूर्ण प्रभावों को कम किया जा सके, अक्सर सुरक्षा और शक्ति के लिए हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। उपवास और काले तिल या तेल चढ़ाना सामान्य प्रथाएं हैं।
उज्जैन में शनिवार, 28 अगस्त 2027 को तिथि एकादशी, नक्षत्र आर्द्रा, योग सिद्धि और करण बालव है। सूर्योदय 06:07, सूर्यास्त 18:48। राहु काल 09:17 से 10:52, इस दौरान नए शुभ कार्य न आरम्भ करें।
| तिथि | एकादशी |
| नक्षत्र | आर्द्रा |
| योग | सिद्धि |
| करण | बालव |
| वार | शनिवार |
| सूर्योदय | 06:07 |
| सूर्यास्त | 18:48 |
| राहु काल | 09:17 – 10:52 |
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 – 12:53 |
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हर शब्द के पीछे की शास्त्रीय परिभाषा, गणितीय आधार और व्यावहारिक प्रयोग।
चान्द्र दिवस — सूर्य-चन्द्र के बीच 12° का अन्तर। प्रति मास 30।
चान्द्र भवन — 27 तारकीय भाग, प्रत्येक 13°20' का।
27 सूर्य-चन्द्र संयोग; (सूर्य+चन्द्र) ÷ 13°20'।
अर्ध-तिथि (6° अन्तर)। विष्टि सहित 11 करण।
वार और स्वामी ग्रह। जूलियन दिवस से निर्धारित।
अशुभ 90 मिनट का काल। वार के अनुसार स्थान बदलता है।
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ काल।