अजा एकादशी 2027
अजा एकादशी 2027 का पर्व शनिवार, शनिवार, 28 अगस्त 2027.
अजा एकादशी 2027 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शनिवार, 28 अगस्त 2027
2027 पंचांग संदर्भ
वार
शनिवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
इस वर्ष अजा एकादशी शनिवार को पड़ रहा है, 2026 (2026-09-07) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Saturday brings a Shani emphasis — ancestral rites and black-sesame offerings carry extra weight, mitigating Shani's shadow.
The 2026 observance fell on Monday, 2026-09-07 — this year arrives 10 days earlier in the Gregorian calendar, the familiar 11-day shift of the unmodified lunar year.
Looking ahead to 2028, Aja Ekadashi will fall on Wednesday, 2028-08-16 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Aja Ekadashi 2027
On Saturday, August 28, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 05:57 IST and sunset at 18:47 IST — a daylight span of 12h 50m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:17 (Kolkata) at the eastern edge to 06:22 (Mumbai) in the west — a 65-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Aja Ekadashi 2027, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the festival tithi being present during that window on 2027-08-28 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
अजा एकादशी 2027 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:57 AM | 6:47 PM |
| मुंबई | 6:22 AM | 6:56 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:33 PM |
| चेन्नई | 5:57 AM | 6:22 PM |
| कोलकाता | 5:17 AM | 5:57 PM |
| पुणे | 6:19 AM | 6:52 PM |
यह तिथि क्यों?
Aja Ekadashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
देवता
भगवान विष्णु (अज / अजन्मा / हरि रूप)
कथा एवं इतिहास
राजा हरिश्चन्द्र सत्य व्रत निभाने के लिए दासत्व बेचे गये, चाण्डाल बन श्मशान में सेवा करते थे। अपने पुत्र के शव के संस्कार के लिए भी धर्म अनुसार उचित शुल्क पर बल दिया। अटूट सत्यनिष्ठा से वे सीमा तक परख… पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
राजा हरिश्चन्द्र सत्य व्रत निभाने के लिए दासत्व बेचे गये, चाण्डाल बन श्मशान में सेवा करते थे। अपने पुत्र के शव के संस्कार के लिए भी धर्म अनुसार उचित शुल्क पर बल दिया। अटूट सत्यनिष्ठा से वे सीमा तक परखे गये। गौतम ऋषि ने उनका दुःख जानकर भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत बताया। हरिश्चन्द्र ने व्रत किया; प्रसन्न देवताओं ने पुत्र, राज्य, और रानी तारामती को पुनः लौटाया। ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह हरिश्चन्द्र-चक्र कथा है।
कैसे मनाएँ
एकादशी व्रत रखें। विष्णु पूजा (हरि रूप, जिनके नाम पर हरिश्चन्द्र थे)। विष्णु सहस्रनाम और हरिश्चन्द्र कथा पाठ। यह व्रत उन साधकों के लिए विशेष शक्तिशाली है जो अन्यायपूर्ण भार सह रहे हैं, जिन्होंने परिस्थिति से सब कुछ खो दिया (अपने दोष से नहीं), और जो कठिन काल में सत्यनिष्ठा के लिए प्रतिबद्ध हैं। बिना आश्रय के हानि सहने वालों को दान।
महत्व
अजा = "अजन्मा / नित्य" (विष्णु और ब्रह्म का नाम)। हरिश्चन्द्र कथा गहन शिक्षा का दृष्टान्त है: धर्म असह्य कष्ट भी माँग सकता है, किन्तु "नित्य" (अज) सत्ता सुनिश्चित करती है कि ऐसी परिस्थितियों में जो खोता है वह अन्ततः लौटता है — कभी इस जन्म में, कभी मुक्ति में। कठोर परीक्षाओं से गुजरने वालों, हरिश्चन्द्र का साहस चाहने वाले न्यायाधीशों और विधि पेशेवरों, और पितृ पक्ष आगमन काल में बहुधा रखी जाती है।
व्रत
एकादशी व्रत – अन्न/दाल वर्जित। सत्यपालन (सत्य व्रत) इस दिन गौण पालन। द्वादशी प्रातः पारण।
अजा एकादशी 2028 खोज रहे हैं?
अजा एकादशी 2028 तिथि व मुहूर्त