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देवता: अहोई माता (रक्षा की देवी)
अहोई अष्टमी माताओं द्वारा बच्चों की रक्षा और दीर्घायु हेतु रखा जाता है। कथा एक स्त्री की है जिसने अनजाने में साही का बच्चा मार दिया, श्राप से सातों पुत्र खोए, और सच्चे पश्चाताप व अहोई माता की कृपा से सभी पुनर्जीवित हुए।
कार्तिक कृष्ण अष्टमी — दीवाली से चार दिन पहले। पूजा तारा उदय पर (चन्द्रोदय नहीं) होती है।
अहोई अष्टमी बच्चों की रक्षा, दीर्घायु और स्वास्थ्य प्रदान करती है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चों की माताओं या सन्तान प्रार्थी माताओं के लिए शक्तिशाली है।
दीवार या बोर्ड पर अहोई माता (साही और शावकों सहित) की छवि बनाएं। सूर्योदय से व्रत रखें — सन्ध्या में तारा उदय तक बिना अन्न-जल। तारा उदय पर जल, अनाज, मिठाई अर्पित करें। अहोई अष्टमी कथा सुनें या पढ़ें। पूजा के बाद तारों को देखकर व्रत तोड़ें।
अहोई अष्टमी व्रत एक पवित्र ग्रन्थ है जिसे उसके पारम्परिक रूप में पढ़ना चाहिए। प्रामाणिक पूर्ण पाठ के लिए अपने पारिवारिक पण्डित या विश्वसनीय प्रकाशन से परामर्श करें।