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देवता: भगवान शिव
सोमवार व्रत भगवान शिव की भक्ति में सोमवार को रखा जाता है। कथा एक निःसन्तान दम्पती की है जिनके वर्षों के सोमवार व्रत से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें सीमित आयु का पुत्र दिया — जो बाद में परिवार की अटल भक्ति से दिव्य कृपा द्वारा बढ़ाई गई।
प्रत्येक सोमवार। श्रेष्ठ फल हेतु 16 सोमवार लगातार (सोलह सोमवार व्रत), विशेषकर श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में।
सोमवार व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूर्ति, स्वास्थ्य, विवाह में बाधा निवारण, सन्तान, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करते हैं।
सवेरे उठें, स्नान करें, शिव मन्दिर जाएं। बिल्वपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा, दूध और जल से अभिषेक करें। घी का दीया और धूप जलाएं। "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करें। सूर्यास्त के बाद एक समय भोजन करें। श्रेष्ठ फल हेतु 16 सोमवार लगातार करें। अन्तिम सोमवार 5 ब्राह्मणों को भोजन कराएं और श्वेत वस्तुएं दान करें।
सोमवार व्रत एक पवित्र ग्रन्थ है जिसे उसके पारम्परिक रूप में पढ़ना चाहिए। प्रामाणिक पूर्ण पाठ के लिए अपने पारिवारिक पण्डित या विश्वसनीय प्रकाशन से परामर्श करें।