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देवता: भगवान शिव
महा शिवरात्रि शिव की महान रात्रि है। कथा बताती है कैसे गुरुद्रुह नामक शिकारी, अनजाने में शिवलिंग के ऊपर बिल्व वृक्ष पर आश्रय लेकर, संयोगवश पूर्ण जागरण कर बैठा — उपवास, बिल्वपत्र अर्पण, और रातभर जागरण — और इस प्रकार मुक्त हुआ। यह सिखाती है कि शिव की कृपा सबके लिए सुलभ है।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — सामान्यतः फरवरी/मार्च। रात्रि 4 प्रहरों में विभक्त होती है।
उपवास, रात्रि जागरण और शिव पूजा सहित महा शिवरात्रि का पालन मोक्ष प्रदान करता है। इस रात अनजाने में भी पूजा का अपार पुण्य है।
पूरे दिन बिना भोजन (निर्जल या फलाहार) व्रत रखें। रात्रि में शिव मन्दिर जाएं। रात को 4 प्रहरों में बांटा जाता है — प्रत्येक प्रहर में अभिषेक करें: पहले दूध, दूसरे दही, तीसरे घी, चौथे मधु से। रातभर बिल्वपत्र, श्वेत पुष्प, भस्म, धतूरा अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय" का निरन्तर जाप करें। पूरी रात जागें। अगली सुबह सूर्योदय पूजा के बाद व्रत तोड़ें।
महा शिवरात्रि व्रत एक पवित्र ग्रन्थ है जिसे उसके पारम्परिक रूप में पढ़ना चाहिए। प्रामाणिक पूर्ण पाठ के लिए अपने पारिवारिक पण्डित या विश्वसनीय प्रकाशन से परामर्श करें।