मकर संक्रान्ति 2026
मकर संक्रान्ति 2026 का पर्व बुधवार, Wednesday, January 14, 2026. तिथि: Capricorn Sankranti (Solar).
मकर संक्रान्ति 2026 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Wednesday, January 14, 2026
2026 कें पंचांग संदर्भ
दिन
बुधवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
Falling on a Wednesday gives the day a Budha emphasis — learning-related rites and green offerings carry extra weight, traditionally favourable for new study.
The 2025 observance fell on Tuesday, 2025-01-14.
Looking ahead to 2027, Makar Sankranti will fall on Thursday, 2027-01-14. So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Makar Sankranti 2026
On Wednesday, January 14, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 07:15 IST and sunset at 17:45 IST — a daylight span of 10h 30m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 06:18 (Kolkata) at the eastern edge to 07:15 (Delhi) in the west — a 57-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Makar Sankranti 2026, the central rite of udaya tithi (sunrise) depends on the Capricorn Sankranti (Solar) being present during that window on 2026-01-14 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
City-Wise Timings for Makar Sankranti 2026
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7:15 AM | 5:45 PM |
| मुंबई | 7:14 AM | 6:20 PM |
| बेंगलुरु | 6:45 AM | 6:11 PM |
| चेन्नई | 6:34 AM | 6:00 PM |
| कोलकाता | 6:18 AM | 5:12 PM |
| पुणे | 7:09 AM | 6:17 PM |
Click any city for detailed local timings, puja vidhi & samagri list
मकर संक्रान्ति 2026 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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मकर संक्रान्ति — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Take a bath in a river/holy water at sunrise (or river-mixed water at home).
- Donate sesame seeds (til) and jaggery (gud) — the festival's signature donation.
- Eat khichdi, til-laddu, and other sesame/jaggery preparations.
- Perform Surya puja at sunrise — Sun is the festival's primary deity.
न करें
- Do not refuse to give til-gud to anyone who asks — it brings bad luck.
- Avoid heavy or oily food at night — keep the day's diet light and sattvic.
- Do not cut hair, nails, or shave today.
- Do not engage in major financial loans or contracts today.
मकर संक्रान्ति 2026 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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The sun begins its northward turn. Wishing you the courage to make the small adjustment that changes everything. Shubh Makar Sankranti.
Sesame sweets, kite strings on rooftops, and bath in the river if you can. Makar Sankranti wishes for the simple version.
After today the days get longer. The festival of permission to be hopeful again. Wishing you that.
Uttarayana. The compass turns. Whatever direction you have been postponing, this is the right week to head toward. Shubh Makar Sankranti.
Til-gud, a kite if you can find one, and a bath in cold water before the sun is high. The old way still works. Shubh Sankranti.
मकर संक्रान्ति वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Makar Sankranti follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- तिल (तिल – कारी आओर उज्जर)
- गुड़
- खिचड़ीक सामग्री (चावल आ उड़द दाल)
- अर्घ्यक लेल नव पात्र (तामा वा पीतलक)(1)
- जल (अर्घ्यक लेल)
पूजाक चरण
- 1
भोरक पवित्र स्नान
सूर्योदय सँ पहिने उठू आ पवित्र स्नान करू। यदि सम्भव हो, कोनो नदी मे, विशेष रूप सँ गङ्गा, यमुना, वा कोनो पवित्र नदी मे स्...
- 2
सूर्य अर्घ्य (सूर्य केँ जल अर्पण)
उगैत सूर्य दिस मुँह करू। तामा/पीतलक पात्र केँ जल सँ भरू, लाल फूल, अक्षत, कुमकुम, आ तिल मिलाउ। दुनू हाथ सँ पात्र केँ ऊपर ...
- 3
वेदी पर सूर्य पूजा
पूरब दिस मुँह कय एकटा छोट वेदी स्थापित करू। सूर्यक प्रतिमा राखू वा कुमकुम सँ सूर्यक चिन्ह बनाउ। एकटा घीक दीप आ धूप जराउ।...
फल (लाभ)
स्वास्थ्य, स्फूर्ति आ दीर्घायु लेल सूर्य देवता केर आशीर्वाद; पवित्र स्नान आ तिल दानक माध्यम सँ पूर्व जन्मक पापसभक शुद्धि; उत्तरायण (देवतासभक मार्ग) केर शुभ आरम्भ; दानक माध्यम सँ समृद्धि; आ मधुर वचन आ तिल-गुड़ साझा करबाक माध्यम सँ सम्बन्धसभ मे सद्भाव।
देवता
सूर्य देव
कथा आ इतिहास
मकर संक्रान्ति ओहि दिन अछि जखन सूर्य मकर राशि मे प्रवेश करैत छथि। अन्य हिन्दू पर्व कें विपरीत ई सौर कैलेण्डर सँ बान्हल अछि — हर साल लगभग ओही ग्रेगोरियन तिथि (14 या 15 जनवरी) कें पड़ैत अछि कारण एकर आधा… पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
मकर संक्रान्ति ओहि दिन अछि जखन सूर्य मकर राशि मे प्रवेश करैत छथि। अन्य हिन्दू पर्व कें विपरीत ई सौर कैलेण्डर सँ बान्हल अछि — हर साल लगभग ओही ग्रेगोरियन तिथि (14 या 15 जनवरी) कें पड़ैत अछि कारण एकर आधार खगोलीय घटना अछि, तिथि नहि।
सबसँ प्रसिद्ध सम्बन्ध महाभारत सँ अछि। कुरुक्षेत्र मे अर्जुन कें बाण सँ शर-शय्या पर पतित भीष्म पितामह प्राण नहि त्यागलनि। हुनका पिता शान्तनु सँ इच्छा-मृत्यु कें वर प्राप्त छल, आ ओ दक्षिणायन मे देह छोड़य सँ मना कय देलखिन्ह। अट्ठावन दिन शर-शय्या पर वेदना सहैत ओ जिअैत रहलाह, ओही अवधि मे युधिष्ठिर कें धर्मोपदेश दैत रहलाह, सूर्य कें उत्तरायण कें प्रतीक्षा मे। जे दिन सूर्य मकर मे प्रविष्ट भेलाह, ओ देह त्यागलनि।
दोसर कथा सूर्य आ हुनकर पुत्र शनि कें अछि। भविष्य पुराण कें अनुसार मकर राशि कें स्वामी शनि अपन पिता सूर्य सँ गृह-कलह कें बाद दूर भय गेल छलाह। मकर संक्रान्ति पर सूर्य अपन पुत्र कें घर पधारैत छथि — पिता-पुत्र कें मेल। ताहि सँ परिवार मे तिल-गुड़ कें वितरण — "तिल-गुड़ ग्या, गोड़-गोड़ बोला।"
तेसर कथा कृषि सँ अछि। उत्तरी मैदान मे खरीफ फसल कटि जाइत अछि; पर्व सूर्य कें प्रति कृतज्ञता कें अछि। तमिलनाडु मे पोङ्गल, पंजाब मे लोहड़ी, असम मे बिहु, गुजरात-राजस्थान मे पतंगोत्सव — सब क्षेत्र मे एक्के दिन अलग-अलग नाम।
खगोलीय आधार महत्वपूर्ण अछि: अन्य सब हिन्दू पर्व चन्द्र-स्थिति सँ नियत अछि, मुदा मकर संक्रान्ति सूर्य-स्थिति सँ।
कनाय पालन करब
सूर्योदय पर पवित्र स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल और गुड़ का दान। पतंग उड़ाएँ। तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी बनाएँ। यह सौर कैलेंडर पर आधारित कुछ त्योहारों में से एक है।
महत्व
दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य के संक्रमण का प्रतीक। दिन लम्बे होने लगते हैं। दान, तपस्या और नई शुरुआत के लिए शुभ।
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