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हिन्दू कैलेंडर चन्द्रमा पर आधारित अछि – प्रत्येक मास अमावस्या सँ अगिला अमावस्या धरि ~29.5 दिनक होइत अछि। 12 चान्द्र मास ~354 दिन – सौर वर्ष सँ ~11 दिन कम। एहि अंतर कें पूरा करबाक लेल हर ~33 मास मे एकटा "अधिक मास" जोड़ल जाइत अछि।
मास अमावस्या पर समाप्त होइत अछि। दक्षिण भारत (गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र, कर्नाटक, तमिलनाडु) मे प्रचलित। भारत सरकारक आधिकारिक मानक (1956 कैलेंडर सुधार)।
मास पूर्णिमा पर समाप्त होइत अछि। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश) मे प्रचलित। एकही चन्द्र मासक अमान्त आ पूर्णिमान्त मे अलग नाम भ' सकैत अछि।
कोना निर्धारित होइत अछि: जखन एकटा चान्द्र मास (अमावस्या सँ अमावस्या) मे सूर्य कोनो संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहि करैत अछि, तखन ओ अधिक मास कहबाइत अछि।
नाम: अधिक मास अगिला "शुद्ध" (नियमित) मासक नाम सँ "अधिक" उपसर्ग लगा कें जानल जाइत अछि। उदाहरण: "अधिक श्रावण" = श्रावण सँ पहिने अतिरिक्त मास।
अधिक मास मे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, उपनयन जेहन शुभ संस्कार वर्जित अछि। एकरा "मलमास" (अशुद्ध मास) सेहो कहल जाइत अछि।
पुरुषोत्तम मास (विष्णुक मास) – दान, जप, व्रत, तीर्थ यात्रा मे विशेष पुण्य। एहि मास मे कएल कोनो पुण्य कार्य सामान्य सँ कतेको गुणा फलदायी। भागवत पुराण पठन विशेष शुभ।
प्रत्येक हिन्दू मासक नाम ओहि नक्षत्र सँ अछि जाहि मे पूर्णिमा अबैत अछि। चैत्र मासक पूर्णिमा चित्रा नक्षत्रक लग, वैशाखक विशाखाक लग।
| चैत्र | चित्रा | विष्णु (वासुदेव) |
| वैशाख | विशाखा | विष्णु (माधव) |
| ज्येष्ठ | ज्येष्ठा | विष्णु (त्रिविक्रम) |
| आषाढ़ | पूर्वा/उत्तरा आषाढ़ा | विष्णु (वामन) |
| श्रावण | श्रवण | विष्णु (हृषीकेश) |
| भाद्रपद | पूर्वा/उत्तरा भाद्रपद | विष्णु (पद्मनाभ) |
| आश्विन | अश्विनी | विष्णु (दामोदर) |
| कार्तिक | कृत्तिका | विष्णु (केशव) |
| मार्गशीर्ष | मृगशिरा | विष्णु (नारायण) |
| पौष | पुष्य | विष्णु (गोविन्द) |
| माघ | मघा | विष्णु (मधुसूदन) |
| फाल्गुन | पूर्वा/उत्तरा फाल्गुनी | विष्णु (नरसिंह) |
| # | ||||
|---|---|---|---|---|
| 1 | Pausha | 20 दिस. | 18 जन. | 29 |
| 2 | Magha | 18 जन. | 17 फर. | 30 |
| 3 | Phalguna | 17 फर. | 19 मार्च | 30 |
| 4 | Chaitra | 19 मार्च | 17 अप्रै. | 29 |
| 5 | Vaishakha | 17 अप्रै. | 16 मई | 29 |
| 6 | Adhika JyeshthaअभीAdhika | 16 मई | 15 जून | 30 |
| 7 | Jyeshtha | 15 जून | 14 जुला. | 29 |
| 8 | Ashadha | 14 जुला. | 12 अग. | 29 |
| 9 | Shravana | 12 अग. | 11 सित. | 30 |
| 10 | Bhadrapada | 11 सित. | 10 अक्टू. | 29 |
| 11 | Ashvina | 10 अक्टू. | 9 नव. | 30 |
| 12 | Kartika | 9 नव. | 9 दिस. | 30 |
| 13 | Margashirsha | 9 दिस. | 7 जन. | 29 |
हिन्दू वर्षक प्रथम मास। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव वर्ष (विक्रम संवत्)। चित्रा नक्षत्र सँ नामकरण। वसंत ऋतु फसल। नव शुरुआत लेल सबसँ पवित्र मास।
विशाखा नक्षत्र सँ नामकरण। अक्षय तृतीया – एहि दिन शुरू कएल कार्य कहियो क्षय नहि होइत अछि। गंगा स्नान पवित्र।
ज्येष्ठा नक्षत्र सँ नामकरण ("सबसँ पैघ")। सबसँ गर्म मास। निर्जला एकादशी – बिना जल के उपवास।
वर्षा ऋतु आरम्भ। गुरु पूर्णिमा – गुरु परंपरा सम्मान। देवशयनी एकादशी – विष्णु निद्रा; अगिला 4 मास (चातुर्मास) शुभ कार्य वर्जित।
शिव पूजाक सबसँ पवित्र मास। प्रत्येक सोमवार उपवास आ शिव पूजा। चरम वर्षा। श्रवण नक्षत्र (कान) – सुनबाक आ सीखबाक मास।
सबसँ बेसी त्योहार वाला मास। कृष्ण जन्माष्टमी। गणेश चतुर्थी – 10 दिवसीय गणेश उत्सव। पितृ पक्ष – पूर्वजक श्राद्धक पखवाड़ा।
महा नवरात्रि – देवी दुर्गाक 9 राति, विजयादशमी पर समाप्त। शरद पूर्णिमा – वर्षक सबसँ चमकीला पूर्णिमा।
त्योहारक मास – दीवाली (कार्तिक अमावस्या) रामक अयोध्या वापसी। देव उठनी एकादशी – विष्णु जागैत छथि; शुभ कार्य पुनः आरम्भ। तुलसी विवाह – विवाह मौसम आरम्भ।
कृष्ण गीता (10.35) मे कहैत छथि: "मासों मे हम मार्गशीर्ष छी" – आध्यात्मिक रूप सँ सबसँ उन्नत मास। गीता जयंती – कुरुक्षेत्र मे कृष्ण अर्जुन कें गीता सुनैलथिन।
मकर संक्रांति – सूर्य मकर राशि मे, उत्तरायण आरम्भ। सौर कैलेंडर पर आधारित (चन्द्र नहि)। पोंगल, लोहड़ी, बिहू – विभिन्न नाम। तिल-गुड़।
वसंत पंचमी – सरस्वती पूजा; बच्चाक विद्यारम्भम। पीयर रंग पहिरू। माघ स्नान – प्रयागराज त्रिवेणी संगम मे स्नान अत्यंत पुण्यदायी। कुम्भ मेला।
महा शिवरात्रि – शिवक महान रात्रि, रात्रि जागरण। होली – फाल्गुन पूर्णिमा पर रंगक त्योहार। हिन्दू वर्षक अंतिम मास।
भारतीय कैलेंडर 6 ऋतु कें मान्यता दैत अछि (पश्चिमी 4 सँ भिन्न)। प्रत्येक ऋतु 2 मासक होइत अछि।