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सफलताक अमृत – सबसँ शक्तिशाली वर-नक्षत्र योग
अमृत सिद्धि योग (संस्कृत: अमृतसिद्धियोग, "सिद्धिक अमृत") ई सभ वर-नक्षत्र योगसभ मे सबसँ शक्तिशाली अछि। ई मात्र ७ विशिष्ट सप्ताहक दिन + नक्षत्रक जोड़ सँ बनैत अछि – सप्ताहक प्रत्येक दिनक लेल एकटा अद्वितीय संयोजन। जखन ई सक्रिय रहैत अछि, तखन ई कोनो महत्वपूर्ण काजक लेल अत्यंत शुभ मानल जाइत अछि, जे बेसी छोटका अशुभ कारक सभ केँ निरस्त कऽ दैत अछि। शास्त्रीय ग्रंथसभ एकरा "अमृत" (रस) कहैत अछि जे सफलता सुनिश्चित करैत अछि।
सप्ताहक प्रत्येक दिन मे ठीक एकटा नक्षत्र होइत अछि जे अमृत सिद्धि योग बनबैत अछि। ई निश्चित अछि आ मुहूर्त दीपिका सँ अबैत अछि:
हस्त(चन्द्र)
मृगशिरा(मंगल)
अश्विनी(केतु)
अनुराधा(शनि)
पुष्य(शनि)
रेवती(बुध)
रोहिणी(चन्द्र)
अमृत सिद्धि योग केँ सार्वभौमिक रूप सँ लाभकारी मानल जाइत अछि – गतिविधि के प्रकार पर कोनो प्रतिबंध नहि अछि। ई विशेष रूप सँ एकर लेल अनुशंसित अछि:
अमृत सिद्धि योग लगभग महीना मे २-३ बेर होइत अछि। चूँकि प्रत्येक सप्ताहक दिन मे मात्र एकटा योग्य नक्षत्र होइत अछि, आ चंद्रमा केँ प्रति नक्षत्र लगभग १ दिन लागैत अछि, विशिष्ट सप्ताहक दिन-नक्षत्र संरेखण प्रति संयोजन लगभग ४ सप्ताह मे एक बेर होइत अछि। सप्ताह भरि मे ७ संयोजनक संग, कुल आवृत्ति मासिक रूप सँ २-३ बेर होइत अछि।
शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथसभ अमृत सिद्धि केँ सर्वार्थ सिद्धि सँ बेसी शक्तिशाली मानैत अछि। जतय सर्वार्थ सिद्धि राहु काल आ भद्रा करण द्वारा रद्द भऽ जाइत अछि, ओतय अमृत सिद्धि केँ छोटका अशुभ कारक सभ केँ निरस्त करबाक लेल पर्याप्त शक्तिशाली मानल जाइत अछि (मुदा ग्रहण वा प्रमुख दोषसभ केँ नहि)। एही कारण सँ अनुभवी ज्योतिषी महत्वपूर्ण मुहूर्तसभक लेल विशेष रूप सँ अमृत सिद्धि केँ खोजैत छथि।