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सब गोटे ई कथा जनैत अछि: न्यूटन एकटा गाछक नीचाँ बैसल छलाह, एकटा सेब खसल, आ ओ १६८७ मे गुरुत्वाकर्षणक खोज केलनि। मुदा ५३७ वर्ष पहिने, एकटा भारतीय गणितज्ञ पहिने सँ लिख चुकल छलाह: "पृथ्वी अपन शक्ति सँ वस्तु सभकेँ अपन दिस आकर्षित करैत अछि।" न्यूटन एकरा परिमाणित केलनि। भारत एकर वर्णन केलक।
Objects are attracted to Earth; the force keeps them from flying off the surface.
"Bodies fall towards the earth as it is in the nature of the earth to attract bodies."
"The Earth draws things downward by its own power." (Goladhyaya, ~1150 CE)
भास्कराचार्य द्वितीय (१११४–११८५ ई.), सिद्धान्त शिरोमणिक लेखक, गुरुत्वाकर्षणक सबसँ स्पष्ट भारतीय कथन लिखने छलाह। गोलाध्याय (आकाशीय गोला पर अध्याय) मे, ओ कहैत छथि जे पृथ्वी अपन शक्ति सँ वस्तु सभकेँ आकर्षित करैत अछि – आ ई शक्ति सभ दिस काज करैत अछि, खाली नीचाँ दिस नहि। ओ उज्जैन वेधशालाक शाही ज्योतिषी छलाह, जे मध्यकालीन युगक सबसँ महान भारतीय गणितज्ञ मानल जाइत छथि।
सिद्धान्त शिरोमणि, गोलाध्याय, भूगोला (पृथ्वी-गोला) पर श्लोक, लगभग ११५० ई.
माटिक स्वभाव वला ई पृथ्वी अपन शक्ति सँ नीचाँ खसैत अछि।
पृथ्वी मे अपन शक्ति सँ वस्तु सभकेँ नीचाँ [अपन दिस] खींचबाक स्वभाव अछि।
वराहमिहिर (५०५–५८७ ई.) पंच सिद्धान्तिका (पाँचटा खगोलीय प्रणालीक एकटा संग्रह) मे गुरुत्वाकर्षणक सबसँ पुरान स्पष्ट विवरण सभ मे सँ एकटा दैत छथि। ओ पूछैत छथि: वस्तु सभ पृथ्वी सँ बाहर कियाक नहि उड़ैत अछि? हुनकर उत्तर: पृथ्वी अपन सतह परक सभ वस्तु सभ पर एकटा आकर्षक शक्ति लगाबैत अछि। ओ ईहो नोट केलनि जे ई शक्ति दूरीक संग बदलैत अछि, जे एकटा उल्लेखनीय अंतर्दृष्टि छल।
Brahmasphutasiddhanta, 628 CE
ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त (६२८ ई.) मे, ब्रह्मगुप्त लिखैत छथि: "वस्तु सभ पृथ्वी दिस खसैत अछि कियाक पृथ्वीक स्वभाव वस्तु सभकेँ आकर्षित करबाक अछि, जेना पाइनक स्वभाव नीचाँ दिस बहबाक अछि।" ई गुरुत्वाकर्षणक एकटा सीधा कथन अछि – "पृथ्वीक स्वभाव मे" – न्यूटन सँ १,०५९ वर्ष पहिने।
India – Description (505–1150 CE)
भारतीय विचारक सभ वर्णन केलनि: (१) पृथ्वी अपन स्वभाव/शक्ति सँ वस्तु सभकेँ आकर्षित करैत अछि; (२) वस्तु सभ पृथ्वीक केंद्र दिस खसैत अछि; (३) ई शक्ति पृथ्वीक सतह पर सार्वभौमिक रूप सँ काज करैत अछि; (४) ई शक्ति दूरीक संग भिन्न भऽ सकैत अछि (वराहमिहिर)। ई सभ गुणात्मक, भौतिक वर्णन अछि – प्राकृतिक दर्शनक परम्परा मे।
Newton – Quantitative Law (1687 CE)
न्यूटनक अद्वितीय योगदान (१६८७): F = Gm₁m₂/r² – कोनो दूटा द्रव्यमानक बीच, कोनो दूरी पर, शक्तिक सटीक परिमाण देनिहार एकटा सटीक गणितीय नियम। न्यूटन ईहो सिद्ध केलनि जे ईहे शक्ति ग्रहीय कक्षा सभक व्याख्या करैत अछि (केप्लरक नियम एहि सँ निकलैत अछि)। वर्णन सँ नियम धरि मात्रात्मक छलांग न्यूटनक प्रतिभा अछि। दुनू योगदान महत्वपूर्ण अछि।
Newton's formula – what India did NOT have
F = G · m₁m₂ / r²
G = gravitational constant | r = distance between masses
ई ऐप मे गुरुत्वाकर्षण खाली दर्शन नहि अछि – ई प्रत्येक पंचांग तत्वक गणितकेँ संचालित करैत अछि। चंद्रमाक कक्षाक गति पृथ्वीक गुरुत्वाकर्षण सँ नियंत्रित होइत अछि, जे निर्धारित करैत अछि जे प्रति मास केटा तिथि होइत अछि। ग्रहणक मार्ग पृथ्वीक चारू दिस चंद्रमाक गुरुत्वाकर्षण मार्ग पर निर्भर करैत अछि। सूर्यक गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पृथ्वीक कक्षाकेँ एकटा हल्का दीर्घवृत्त मे चपटा करैत अछि, जे सूर्योदयक गणना मे समय समीकरण सुधारक कारण बनैत अछि। चंद्रमाक गुरुत्वाकर्षण ज्वार तिथि सभक शुरू आ समाप्त होयबाक सटीक क्षणकेँ प्रभावित करैत अछि।
भास्कराचार्य द्वितीय उज्जैन वेधशाला मे काज केलनि, जे १,५०० वर्ष सँ बेसी समय धरि भारतक "प्रधान मध्याह्न रेखा" क रूप मे काज केलक। ई वेधशाला कम सँ कम ५०० ई. सँ खगोलीय शोधक केंद्र छल। ब्रह्मगुप्त, वराहमिहिर, आ भास्कराचार्य द्वितीय सभ एतय वा एकर बौद्धिक परम्परा मे काज केलनि। वेधशालाक डेटा सीधा गुरुत्वाकर्षण गणना मे गेल: चंद्रमाक त्वरणक सटीक अवलोकन, बृहस्पति ग्रहक कक्षीय विक्षोभ, आ पृथ्वीक अक्षक अग्रगमन सभकेँ गुरुत्वाकर्षणक समझक आवश्यकता होइत अछि।