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वर्तमान ग्रह गतिसँ अहाँक जीवनमे घटनासभ कोना प्रेरित होइत अछि
गोचर वर्तमान ग्रह स्थितिसभक अध्ययन छी जखन ओ राशिचक्रमे गति करैत अछि, जे अहाँक जन्म चन्द्र राशि (जन्म राशि) क सापेक्षमे मापल जाइत अछि।
दशाकेँ अपन जीवनक फिल्मक स्क्रिप्ट आ गोचरकेँ फिल्मांकनक समयमे मौसम बुझू।
वैदिक ज्योतिषमे गोचर मुख्य रूपसँ चन्द्र राशिसँ आँकल जाइत अछि, पश्चिमी ज्योतिषमे प्रयुक्त सूर्य राशिसँ नहि।
अनुभवी ज्योतिषी लग्न आ सम्बन्धित भाव स्वामीसँ सेहो गोचर जाँचैत छथि।
गोचर भाव = वर्तमान ग्रह राशि - जन्म चंद्र राशि + 1
उदाहरण: यदि जन्म चन्द्र वृषभ (2) मे अछि आ शनि वर्तमान मे कर्क (4) मे अछि → चन्द्र सँ 3म भाव मे शनि गोचर
धीमा ग्रह (गुरु, शनि, राहु/केतु) सभसँ गहीर आ स्थायी प्रभाव डालैत छथि कारण ओ सभ महीना वा वर्ष धरि एक भाव केँ प्रभावित करैत छथि। तीव्र गति सँ चलयवला ग्रह (चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र) धीमा ग्रहसभ द्वारा निर्धारित ढाँचाक भीतर भविष्यवाणी केँ सूक्ष्म-समायोजित करैत छथि।
साढ़ेसाती ज्योतिषमे सबसँ बेसी चर्चित गोचर छी।
सदिखन नकारात्मक नहि – जन्म कुण्डलीमे नीक स्थानक शनि लेल साढ़ेसाती अनुशासन आ करियरमे उन्नति आनि सकैत अछि।
साढ़े सातीक तीन चरण:
पहिल चरण (चंद्रमा सँ १२म): उदयक चरण – मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव, दिशामे संदेह
दोसर चरण (चंद्रमा सँ १म): चरम तीव्रता – पहचानक परिवर्तन, स्वास्थ्यक चुनौती, करियरमे उथल-पुथल
तेसर चरण (चंद्रमा सँ २म): अस्ताचलक चरण – आर्थिक पुनर्गठन, वाणीक समस्या, पारिवारिक समायोजन
शनि परिक्रमा: २९.४६ वर्ष → सभ जीवनमे २-३ बेर साढ़े सातीक सामना करैत अछि
गुरु एकटा पूर्ण कक्षामे लगभग 12 वर्ष लैत अछि, प्रत्येक राशिमे लगभग 1 वर्ष रहैत अछि।
कोनो प्रमुख घटना प्रकट होयबा लेल गुरु आ शनि दुनूकेँ एकसंग सम्बन्धित भावकेँ दृष्टि करबाक चाही।
गुरु अपन स्थितिसँ 5म, 7म आ 9म भावकेँ दृष्टि करैत अछि। शनि 3य, 7म आ 10म भावकेँ दृष्टि करैत अछि।
दोहरा गोचरक उदाहरण:
विवाह: गुरु + शनि दुनू चंद्रमा सँ ७म भाव पर दृष्टि दैत अछि
नौकरीमे परिवर्तन: गुरु + शनि दुनू चंद्रमा सँ १०म भाव पर दृष्टि दैत अछि
संतानक जन्म: गुरु + शनि दुनू चंद्रमा सँ ५म भाव पर दृष्टि दैत अछि
संपत्ति खरीद: गुरु + शनि दुनू चंद्रमा सँ ४म भाव पर दृष्टि दैत अछि
ध्यान दियौ: ई घटना चलैत दशा द्वारा सेहो समर्थित हेबाक चाही – दोहरा गोचर समयक खिड़की दैत अछि, दशा वचन दैत अछि।
राहु आ केतु सदिखन विपरीत राशिसभमे गोचर करैत अछि, लगभग 18 वर्षमे वक्री गतिसँ चलैत अछि।
राहु-केतु अक्ष 1-7 भाव अक्ष पर गोचर करबासँ पहचान आ सम्बन्धसभकेँ काफी बदलि सकैत अछि।
अष्टकवर्ग एकटा संख्यात्मक प्रणाली छी जे प्रत्येक राशिमे प्रत्येक ग्रहक गोचरक प्रभावशीलताकेँ अंकित करैत अछि।
सर्वाष्टकवर्ग त्वरित अवलोकन दैत अछि: 28+ कुल अंकवाली राशिसभ अत्यन्त सहायक अछि।
अष्टकवर्ग अंकन:
| भाव | शनि गोचर प्रभाव | गुरु गोचर प्रभाव |
|---|---|---|
| 1 | तनाव, स्वास्थ्य, पहचान संकट | आत्मविश्वास, नई शुरुआत |
| 2 | आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव | धन वृद्धि, मधुर वाणी |
| 3 | साहस, प्रयास फलित, छोटी यात्राएँ | पहल में कमी, आलस्य |
| 4 | घरेलू अशान्ति, माता स्वास्थ्य | गृह सुख, वाहन, मातृ सुख |
| 5 | संतान समस्या, रचनात्मकता में कमी | संतान, शिक्षा, प्रेम, आध्यात्मिक वृद्धि |
| 6 | शत्रुओं पर विजय, स्वास्थ्य सुधार | ऋण/रोग, कानूनी परेशानी |
| 7 | सम्बन्ध तनाव, साझेदारी समस्या | विवाह, साझेदारी, यात्रा |
| 8 | दीर्घ रोग, दुर्घटना, परिवर्तन | अचानक घटनाएँ, विरासत |
| 9 | पिता समस्या, धर्म प्रश्न, विलम्बित भाग्य | भाग्य, तीर्थयात्रा, गुरु कृपा |
| 10 | करियर पुनर्गठन, भारी ज़िम्मेदारी | करियर शिखर, मान्यता, अधिकार |
| 11 | कठिन परिश्रम से लाभ | अधिकतम लाभ, इच्छा पूर्ति |
| 12 | व्यय, एकांत, विदेश यात्रा | व्यय, आध्यात्मिक वृद्धि, विदेश |
दूटा महत्त्वपूर्ण गोचर सूचक: चन्द्र बलम आ तारा बलम मिलिकऽ दैनिक शुभता निर्धारित करैत अछि।
चंद्र बलं (चंद्रमाक बल):
जन्म चन्द्र सँ शुभ भाव: 3, 6, 7, 10, 11
अशुभ: 1, 2, 4, 5, 8, 9, 12
तारा बलं (ताराक बल):
9 तारा: जन्म, सम्पत्, विपत्, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, वध, मित्र, परम मित्र
शुभ तारा: 2 (सम्पत्), 4 (क्षेम), 6 (साधक), 8 (मित्र), 9 (परम मित्र)