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भास्कराचार्य का 1150 ईस्वी में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल का वर्णन, और ब्रह्मगुप्त तथा वराहमिहिर में पहले के पूर्वाभास
न्यूटन के सेब की कहानी प्रसिद्ध है – 1665 में गिरते सेब ने गुरुत्वाकर्षण का नियम प्रेरित किया। लेकिन पृथ्वी को एक ऐसी वस्तु के रूप में देखना जो चीज़ों को अपनी ओर खींचती है, भारत में न्यूटन से 1,000 से अधिक वर्ष पहले से एक स्थापित वैज्ञानिक विचार था।
वराहमिहिर (५०५ ईस्वी)
बृहत् संहिता – पृथ्वीक स्वाभाविक आकर्षण शक्ति केर वर्णन करैत अछि। पुछैत अछि: गोलाकार पृथ्वीक नीचाँ वस्तु सभ किएक खसि नहि जाइत अछि? उत्तर: पृथ्वी सभ किछुकेँ आकर्षित करैत अछि।
ब्रह्मगुप्त (६२८ ईस्वी)
ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त – "पृथ्वी सभ वस्तुकेँ अपन दिस आकर्षित करैत अछि।" स्पष्ट आ संक्षिप्त कथन।
भास्कराचार्य (११५० ईस्वी)
सिद्धान्त शिरोमणि – सबसँ विस्तृत विवेचन। "पृथ्वीमे आकर्षणक गुण अछि। सभ भारी वस्तु पृथ्वी पर खसि जाइत अछि।" गोलाध्यायमे विस्तृत चर्चा।
“पृथ्वीमे सभ दिस आकर्षणक शक्ति अछि। भारी वस्तु आकाशमे (पृथ्वी दिस) खसि जाइत अछि। एहि लेल पृथ्वी सभक आधार अछि।”
– भास्कराचार्य, सिद्धान्त शिरोमणि, गोलाध्याय (११५० ईस्वी)