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नवग्रहक कुण्डली मे स्थिति आ ओकर अर्थ बुझनाइ
वैदिक ज्योतिष मे नौ खगोलीय पिण्डक – नवग्रहक – स्थिति प्रत्येक कुण्डली पठनक आधार छी। ई केवल खगोलीय निर्देशांक नहि अछि; ई ब्रह्माण्डीय शक्तिक प्रतिनिधित्व करैत अछि जे व्यक्तित्व, भाग्य आ जीवनक घटनाक लय केँ आकार दैत अछि।
नौ वैदिक ग्रह अछि: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु आ केतु। पश्चिमी ज्योतिषक विपरीत, वैदिक ज्योतिष यूरेनस, नेपच्यून वा प्लूटोक प्रयोग नहि करैत अछि – केवल ज्योति (सूर्य, चन्द्र), पाँच दृश्य ग्रह (मंगल सँ शनि), आ दू चन्द्र पात (राहु, केतु) मानल जाइत अछि।
प्रत्येक ग्रहक स्थिति पाँच प्रमुख जानकारी संकेतित करैत अछि: देशान्तर (0-360 अंश), राशि (1-12), भाव (1-12), नक्षत्र (1-27), आ नक्षत्र पाद (1-4)। ई सभ परत मिलि कऽ ग्रहक अभिव्यक्तिक बहुआयामी चित्र बनबैत अछि।
जखन अहाँ एहि साइट पर कुण्डली बनबैत छी, ग्रह टैब प्रत्येक ग्रहक लेल स्तम्भक तालिका देखबैत अछि। प्रत्येक स्तम्भ की कहैत अछि आ व्याख्याक लेल किएँ महत्वपूर्ण अछि:
| 10 | 28\u00b015' | 3 | - | |||
| 4 | 5\u00b012' | 1 | R |
राशि बतबैत अछि जे ग्रह कोना अभिव्यक्त होइत अछि। कर्क मे मंगल भावनात्मक आ रक्षात्मक ढंग सँ कार्य करैत अछि; मकर मे मंगल अनुशासित महत्वाकांक्षा सँ। राशि ग्रहक "वेश" छी।
भाव बतबैत अछि जे ग्रह जीवनक कोन क्षेत्र मे कार्य करैत अछि। 10म भाव मे मंगल करियर चलबैत अछि; 4था भाव मे गृह जीवन प्रभावित करैत अछि। भाव ओ "मंच" छी जाहि पर ग्रह प्रदर्शन करैत अछि।
नक्षत्र ग्रहक अभिव्यक्ति मे गहीर स्वाद जोड़ैत अछि। मृगशिरा मे मंगल जिज्ञासा आ अथक खोज सँ कार्य करैत अछि; भरणी मे मंगल तीव्रता आ परिवर्तनकारी शक्ति सँ। 27 नक्षत्र अछि, प्रत्येक 13 अंश 20 कलाक।
वक्री ग्रह आकाश मे पाछू चलैत प्रतीत होइत अछि (पृथ्वी सँ एकटा दृष्टिभ्रम)। ज्योतिष मे वक्री ग्रह "खराब" नहि अछि – ई आन्तरिक, तीव्र ऊर्जाक प्रतिनिधित्व करैत अछि। वक्री गुरु दार्शनिक जिज्ञासा केँ अन्तर्मुखी करैत अछि; वक्री शनि कर्तव्य पर गहन आत्मनिरीक्षण कराबैत अछि।
प्रत्येक तत्वक राशि मे ग्रह कोना व्यवहार करैत अछि ताहिक त्वरित सन्दर्भ। अग्नि राशि (मेष, सिंह, धनु) क्रिया आ आत्मविश्वास बढ़बैत अछि; पृथ्वी (वृषभ, कन्या, मकर) स्थिर करैत अछि; वायु (मिथुन, तुला, कुम्भ) बौद्धिक बनबैत अछि; जल (कर्क, वृश्चिक, मीन) भावना गहीर करैत अछि।
ग्रहक गरिमा कोनो राशि मे ओकर आरामक स्तर वर्णन करैत अछि। जखन ग्रह अपन उच्च राशि मे होइत अछि, ओ चरम क्षमता पर कार्य करैत अछि। नीच मे ग्रह संघर्ष करैत अछि। स्वराशि आरामदायक, विश्वसनीय परिणाम दैत अछि।
| उच्च | नीच | स्वराशि | मूलत्रिकोण | |
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