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बुधादित्ययोगः
निर्माण नियम
सूर्य आ बुध एकै घरमे युति करैत छथि
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
बुधादित्य योग सबसँ सामान्य योगमेसँ एक अछि, जे तखन बनैत अछि जखन सूर्य आ बुध युति करैत छथि। कारण बुध कखनो सूर्य सँ २८ अंशसँ अधिक दूर नहि जाइत छथि, ई युति लगभग एक-तृतीयांश कुण्डलीमे होइत अछि।
ई योग सूर्य क अधिकार आ आत्मविश्वासकेँ बुध क बुद्धि आ संचार कौशलसँ मिलबैत अछि। जखन दुनू ग्रह बलिष्ठ होइत छथि आ बुध अस्त नहि होइत छथि (सूर्य सँ ५ अंशसँ अधिक दूर), तखन ई योग तीक्ष्ण बुद्धि, प्रशासनिक क्षमता, आ ज्ञानसँ यश प्रदान करैत अछि।
तथापि, जखन बुध सूर्य क बहुत निकट होइत छथि (५ अंशक भीतर), तखन अस्त बुध क बौद्धिक स्पष्टताकेँ दुर्बल करि दैत अछि। ई योग सबसँ शक्तिशाली तखन होइत अछि जखन सूर्य आ बुध दुनूक लेल अनुकूल राशिमे होइत छथि — सिंह, मिथुन, वा कन्या।
बुद्धि आ प्रशासन
तीक्ष्ण विश्लेषणात्मक मन, प्रशासनिक प्रतिभा, सरकारी वा प्रबन्धन क्षेत्रमे सफलता।
संचार
वाक्पटु वक्ता, लेखन क्षमता, अध्यापन प्रतिभा। बौद्धिक उपलब्धिसँ यश।
बुधादित्य योगवला व्यक्ति प्रायः तीव्र बुद्धि आ प्रबल संचार कौशल प्रदर्शित करैत छथि, जे हुनका शैक्षणिक, प्रशासनिक वा साहित्यिक क्षेत्रमे सफलता दिस ल जाइत अछि। ओ लोकनि स्पष्ट वक्ता आ लेखक होइत छथि, जे जटिल विचारसभकेँ स्पष्ट रूपसँ व्यक्त करबामे सक्षम होइत छथि। ई योग प्रायः एहन सम्मानित पेशेवरक रूपमे प्रकट होइत अछि जे अपन ज्ञान आ नेतृत्व क्षमताक लेल जानल जाइत छथि, प्रायः सरकारी वा शैक्षणिक क्षेत्रमे।
बुधादित्य योगक फल सामान्यतः सूर्य वा बुधक दशा वा अंतर्दशा कालमे प्रकट होइत अछि। ई काल प्रायः बौद्धिक विकास, सम्मान आ व्यावसायिक उन्नतिक अवसर लबैत अछि।
रत्न
बुधक लेल पन्ना (Emerald)
मन्त्र
ॐ बुं बुधाय नमः
दान
बुधवारकें हरियर तरकारी, मूंग दालि दान करू
शास्त्रीय सन्दर्भ
सूर्यबुधयुतिर्यत्र बुधादित्ययोगकृत्। मेधावी प्रशासक श्रेष्ठो विद्यया यशमाप्नुयात्॥
– Saravali, Chapter 16