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ग्रहसंघातयोगः
निर्माण नियम
सातू ग्रह (सूर्य–शनि) ४ क्रमिक भावक भीतर
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
ग्रह संघात तखन बनैत अछि जखन सातू दृश्यमान ग्रह (सूर्य सँ शनि धरि) मात्र ४ भावक संकीर्ण क्षेत्रमे केन्द्रित होइत छथि। एहिसँ तीव्र, एकाग्र ऊर्जाक निर्माण होइत अछि — बाढ़िक प्रकाशक बजाय लेजरक जेकाँ। जाहि भावमे ई केन्द्रण होइत अछि से निर्धारित करैत अछि जे ई सकारात्मक (केन्द्र/त्रिकोण) होयत वा जीवनमे असन्तुलन (दुस्थान) उत्पन्न करत।
केन्द्रित ऊर्जा
समस्त ग्रहीय ऊर्जा एकटा संकीर्ण क्षेत्रमे केन्द्रित — तीव्र जीवन-विषय, गहन विशेषज्ञता, किन्तु अनाधिकृत भावमे सम्भावित असन्तुलन।
ग्रह संघातसँ युक्त व्यक्ति प्रायः विशिष्ट जीवन क्षेत्रसभमे असाधारण एकाग्रता आ गहन विशेषज्ञता प्रदर्शित करैत छथि, जाहिसँ महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त होइत अछि। मुदा, ई तीव्र एकाग्रता जीवनक अन्य क्षेत्रसभ, जेना संबंध वा सामान्य कल्याणकेँ उपेक्षित वा अविकसित छोड़ि सकैत अछि, जाहिसँ एकटा असंतुलित जीवन अनुभव उत्पन्न होइत अछि। हुनकर स्वभाव एकनिष्ठ लक्ष्य प्राप्ति आ गहन विशेषज्ञता दिस उन्मुख होइत अछि।
ग्रह संघातक परिणाम सामान्यतः संबंधित ग्रहसभक महादशा वा अंतर्दशाक कालमे प्रबल रूपसँ प्रकट होइत अछि, विशेषतः सूर्य, चंद्र, वा ओहि भावक स्वामीक जतय ई समूह स्थित अछि।