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गुरुलग्नयोगः
निर्माण नियम
पहिल भावमे बृहस्पति
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
लग्न मे बृहस्पति — ज्ञान, दैवी अनुग्रह, उदार स्वभाव, समाजमे सम्मानित। सर्वश्रेष्ठ ग्रहीय स्थितिमेसँ एक, जातककें स्वाभाविक रूपेँ नैतिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण प्रदान करैत अछि।
ज्ञान एवं अनुग्रह
दैवी अनुग्रह, उदार स्वभाव, दार्शनिक दृष्टिकोण।
लग्नमे गुरु बला व्यक्ति प्रायः एकटा गरिमामय आऽ आशावादी व्यवहार प्रदर्शित करैत छथि, स्वाभाविक रूप सँ सम्मान आकर्षित करैत छथि। हुनका सँ प्रायः सलाह लेल जाइत छनि, अपन उदार आऽ नैतिक दृष्टिकोण सँ सामंजस्यपूर्ण संबंधकेँ बढ़ावा दैत छथि। करियरक मार्गमे प्रायः शिक्षण, परामर्श वा कानून शामिल होइत छनि, जतय हुनकर दार्शनिक अंतर्दृष्टि फलीभूत होइत छनि। स्वास्थ्यक दृष्टिएँ, मजबूत प्रतिरक्षा सामान्य अछि, यद्यपि विस्तारक प्रवृत्ति देखल जा सकैत अछि।
एहि योग केर परिणाम सामान्यतः गुरु केर दशा वा अंतर्दशा मे प्रकट होइत अछि, विशेष रूप सँ जखन गुरु बलवान होथि वा लग्न स्वामी सँ संबंधित होथि। गुरु केर गोचर, जन्मकालीन ग्रह लोकनि पर वा शुभ भाव सँ, एकर शुभ फल केँ सेहो सक्रिय कऽ सकैत अछि।