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गुरुशुक्रयोगः
निर्माण नियम
बृहस्पति शुक्रक संग युति
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
महान शुभ ग्रह युति — धन + ज्ञानक संयोग, कलाक संरक्षण, उदार आ सुंदर जीवन। आध्यात्मिक आ भौतिक इच्छाक बीच आंतरिक संघर्षक संभावना, कारण बृहस्पति (आध्यात्मिकता) आ शुक्र (भौतिकता) स्वाभाविक शत्रु छथि।
धन + ज्ञान
कलाक संरक्षण, उदार जीवन, किंतु आध्यात्मिक-भौतिक तनावक संभावना।
ई योग प्रायः एहन व्यक्तिमे प्रकट होइत अछि जे परिष्कृत सौंदर्यबोध आ परोपकार तथा कला दिस स्वाभाविक झुकाव रखैत छथि। ओ लोकनि प्रायः आरामदायक, एहि धरि कि विलासितापूर्ण जीवनशैलीक आनंद लैत छथि, आ प्रायः रचनात्मक वा सलाहकार भूमिकाक माध्यम सँ धन आकर्षित करैत छथि। मुदा, हुनकर आध्यात्मिक आकांक्षासभ आ भौतिक आसक्तिसभक बीच एकटा अंतर्निहित तनाव कहियो-कहियो आंतरिक संघर्ष वा अनिर्णयक कारण बनि सकैत अछि। हुनकर उदार आ सुसंस्कृत स्वभावकें प्रायः दोसर लोकनि नीक जकाँ पहचानैत छथि।
गुरु-शुक्र योगक परिणाम प्रायः गुरु वा शुक्रक दशा वा अंतर्दशा कालमे सक्रिय होइत अछि। ई काल प्रायः आर्थिक विकास, कलात्मक कार्य आ आध्यात्मिक चिंतनक लेल अवसर लबैत अछि, जे योगक द्वैत प्रकृति पर प्रकाश डालैत अछि।