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कालामृतयोगः
निर्माण नियम
सभटा ग्रह सूर्य-चन्द्रमा अक्षक बीच (नहि राहु-केतु अक्ष)
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
काल अमृत — सभटा ग्रह सूर्य-चन्द्रमा चापक भीतर अछि। काल सर्पसँ मिलैत-जुलैत, परन्तु राहु-केतुक स्थानपर ज्योतिर्मय पिण्ड। केन्द्रित ऊर्जा, आध्यात्मिक सम्भावना, एवं अर्थपूर्ण उपलब्धिक लेल नियति।
केन्द्रित उद्देश्य
केन्द्रित ऊर्जा, आध्यात्मिक सम्भावना, अर्थपूर्ण उपलब्धि।
काल अमृत योग वला व्यक्ति प्रायः अत्यधिक एकाग्र ऊर्जा प्रदर्शित करैत छथि, अपन प्रयासकेँ एकटा अद्वितीय, सार्थक उद्देश्य दिस निर्देशित करैत। ई एकाग्रता हुनका अपन चुनल क्षेत्र मे – जे प्रायः आध्यात्मिक वा गहन बौद्धिक होइत अछि – महत्वपूर्ण उपलब्धिसभ दिस लऽ जा सकैत अछि। हुनकर स्वभाव तीव्र आ समर्पित होइत अछि, आ अपन गहन आन्तरिक प्रेरणाक कारण कहियो-कहियो सम्बन्ध मे उदासीन प्रतीत होइत छथि। स्वास्थ्य हुनकर मानसिक तीव्रताकेँ प्रतिबिम्बित कऽ सकैत अछि।
सामान्यतः, ई योगक परिणाम सूर्य, चन्द्रमा वा ओकर चाप मे समाहित कोनो ग्रहक दशा वा अन्तर्दशा काल मे सक्रिय होइत अछि, जाहि सँ एकाग्र उपलब्धिसभकेँ बढ़ावा भेटैत अछि।