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त्रिवक्रीयोगः
निर्माण नियम
जन्मकाल मे ३ वा अधिक ग्रह वक्री मे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
अनेक वक्री ग्रह — आन्तरिकृत ऊर्जा, विलम्बित फल, अपरम्परागत जीवन-पथ। पूर्व जन्मक कर्मिक तीव्रता। एहि जातक प्रायः आन्तरिक विकासक एक कालखण्डक पश्चात् जीवनक उत्तरार्धमे सफल होइत छथि।
विलम्बित सफलता
आन्तरिकृत ऊर्जा, अपरम्परागत पथ, जीवनक उत्तरार्धमे सफलता।
त्रि-वक्री योग सँ युक्त व्यक्तिगण प्रायः एकटा विशिष्ट जीवन-पथक अनुभव करैत छथि, जतय पारम्परिक वृत्ति-मार्गमे प्रारम्भिक संघर्ष देखल जाइत अछि, आ गहन आत्म-अन्वेषणक उपरान्त मात्र सफलता प्राप्त होइत अछि। हुनकर सम्बन्धसभमे सेहो विलम्ब भऽ सकैत अछि वा अपारम्परिक दृष्टिकोणाक आवश्यकता भऽ सकैत अछि। स्वभावतः, ओ सभ गम्भीर रूप सँ आत्म-चिन्तनशील होइत छथि, कहियो-काल्हि आरक्षित वा दोसरक द्वारा गलत बुझल जाइत छथि। ई आन्तरिक ऊर्जा व्यक्तिगत स्थानक आवश्यकताक रूपमे प्रकट भऽ सकैत अछि।
त्रि-वक्री योगक परिणाम सामान्यतः संबंधित वक्री ग्रहसभक (जेना बुध, गुरु, शनि) दशा वा अंतर्दशाक कालमे प्रबल रूपसँ प्रकट होइत अछि। ई काल प्रायः महत्वपूर्ण आत्मनिरीक्षण आ जीवन बदलनिहार निर्णय लबैत अछि।