अनन्त चतुर्दशी 2026
अनन्त चतुर्दशी 2026 का पर्व शुक्रवार, शुक्रवार, 25 सितंबर 2026. तिथि: bhadrapada shukla 14.
अनन्त चतुर्दशी 2026 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
2026 पंचांग संदर्भ
वार
शुक्रवार
विक्रम संवत्
2083
शक संवत्
1948
इस वर्ष अनन्त चतुर्दशी शुक्रवार को पड़ रहा है, 2025 (2025-09-06) से 19 दिन बाद — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
Falling on a Friday gives the day a Shukra emphasis — relationship-related rites and white/silver offerings carry extra weight, traditionally favourable for women's vratas.
The 2025 observance fell on Saturday, 2025-09-06 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2027, Anant Chaturdashi will fall on Tuesday, 2027-09-14 (11 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Anant Chaturdashi 2026
On Friday, September 25, 2026, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:10 IST and sunset at 18:14 IST — a daylight span of 12h 4m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:26 (Kolkata) at the eastern edge to 06:27 (Mumbai) in the west — a 61-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Anant Chaturdashi 2026, the central rite of उदय तिथि (सूर्योदय) depends on the Bhadrapada Shukla 14 being present during that window on 2026-09-25 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
अनन्त चतुर्दशी 2026 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:10 AM | 6:14 PM |
| मुंबई | 6:27 AM | 6:32 PM |
| बेंगलुरु | 6:08 AM | 6:13 PM |
| चेन्नई | 5:58 AM | 6:03 PM |
| कोलकाता | 5:26 AM | 5:30 PM |
| पुणे | 6:23 AM | 6:28 PM |
यह तिथि क्यों?
Anant Chaturdashi उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- अनन्त सूत्र (14 गाँठों वाला पवित्र धागा)
- दूर्वा/कुश घास
- अक्षत (साबुत चावल)
- कुमकुम (सिन्दूर)
- चन्दन का लेप
पूजा के चरण
- 1
तैयारी एवं स्थापना
प्रातः उठें और स्नान करें। पूजा स्थल साफ करें। अनन्त सूत्र तैयार करें: सूती धागा लें, हल्दी या केसर से रंगें, और विष्णु ...
- 2
अनन्त व्रत कथा
अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें, जिसमें भगवान कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को यह व्रत करने का उपदेश और राजा सुमन्त तथा ...
- 3
अनन्त सूत्र पूजा
अनन्त सूत्र (14 गाँठों वाले) की पूजा चन्दन, कुमकुम और अक्षत लगाकर करें। फूल और अगरबत्ती अर्पित करें। 14 गाँठें भगवान विष...
फल (लाभ)
अनन्त चतुर्दशी भगवान विष्णु का अनन्त (असीम) आशीर्वाद प्रदान करती है। 14 वर्ष का व्रत अनन्त समृद्धि, दरिद्रता और दुःख का निवारण, और अन्ततः मोक्ष प्रदान करता है। गणेश विसर्जन वैराग्य का आध्यात्मिक पाठ सिखाता है – दिव्यता का हर्षपूर्वक स्वागत और समान कृपा से विदाई।
देवता
भगवान विष्णु (अनन्त रूप), भगवान गणेश
कथा एवं इतिहास
अनन्त चतुर्दशी विष्णु के अनन्त (अनन्तशेष पर विराजमान) रूप को समर्पित है। महाभारत में कृष्ण ने युधिष्ठिर को अनन्त व्रत कथा सुनाई। यह गणेश चतुर्थी के दसवें दिन गणेश विसर्जन का भी दिन है।
कैसे मनाएँ
दाहिने हाथ पर हल्दी से रंगा 14 गाँठों वाला अनन्त धागा बाँधें। विष्णु को 14 प्रकार के फूल, फल और मिठाइयाँ अर्पित करें। गणेश प्रतिमा को ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस में ले जाकर जल में विसर्जित करें।
महत्व
अनन्त चतुर्दशी विष्णु की अनन्त और अविनाशी प्रकृति का प्रतीक है। 14 गाँठें 14 लोकों का प्रतीक हैं। गणेश विसर्जन अनासक्ति और आगमन-प्रस्थान चक्र की शिक्षा देता है।
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