दिल्ली · Delhi
गोवर्धन पूजा 2025दिल्ली में
दिल्ली के निर्देशांकों (28.61°N, 77.21°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
बुधवार, 22 अक्टूबर 2025
सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
17:44
यह तिथि क्यों?
Govardhan Puja उदय तिथि नियम का पालन करता है — जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- गोबर (गोवर्धन की मूर्ति के लिए)
- कृष्ण मूर्ति या चित्र
- अन्नकूट सामग्री (56 प्रकार के भोग)
- फूल और मालाएँ
- तुलसी के पत्ते
पूजा के चरण
- 1
गोवर्धन पर्वत बनाना
आँगन या पूजा स्थल में गोबर से एक छोटी पहाड़ी (गोवर्धन) बनाएँ। इसे फूलों, घास और छोटे पौधों से सजाएँ। ऊपर कृष्ण मूर्ति रख...
- 2
गौ पूजा
गाय की पूजा करें — कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएँ, माला अर्पित करें, और ताज़ा हरा चारा एवं गुड़ खिलाएँ। गाय कामधेनु का प्...
- 3
संकल्प
दाहिने हाथ में जल और अक्षत लें। अपना नाम, गोत्र, तिथि (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) और गोवर्धन पूजा का उद्देश्य बोलें। जल छोड...
फल (लाभ)
गोवर्धन पूजा से भगवान कृष्ण की कृपा, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, अन्न-धन की प्रचुरता, गो-कुटुम्ब का कल्याण और भगवान के प्रति भक्ति गहरी होती है।
गणना प्रमाण — पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
भगवान कृष्ण
कथा एवं इतिहास
गोवर्धन पूजा उस दिन का स्मरण है जब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर वृन्दावन के लोगों और गौओं को इन्द्र की प्रलयकारी वर्षा से बचाया। कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इन्द्र यज्ञ बन...पूरी कथा पढ़ें →
गोवर्धन पूजा उस दिन का स्मरण है जब बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर वृन्दावन के लोगों और गौओं को इन्द्र की प्रलयकारी वर्षा से बचाया। कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इन्द्र यज्ञ बन्द कर गोवर्धन की पूजा की। पराजित इन्द्र ने कृष्ण से क्षमा माँगी।
कैसे मनाएँ
गोवर्धन पर्वत के आकार में अन्नकूट सजाएँ — चावल, दाल, सब्ज़ियाँ, मिठाइयाँ। कृष्ण को अर्पित करें। गौओं को सजाकर पूजा करें। गोबर से गोवर्धन बनाकर परिक्रमा करें। मन्दिर में अन्नकूट दर्शन करें।
महत्व
गोवर्धन पूजा प्रकृति-भक्ति और आत्मनिर्भरता की शिक्षा देती है। कृष्ण ने दिखाया कि समुदाय का पोषण करने वाला पर्वत और गौएँ पूजा के योग्य हैं। यह दीपावली का चौथा दिन है।