होलिका दहन 2025
होलिका दहन 2025 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
गुरुवार, 13 मार्च 2025
होलिका दहन 2025 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:33 AM | 6:28 PM |
| मुंबई | 6:48 AM | 6:47 PM |
| बेंगलुरु | 6:28 AM | 6:29 PM |
| चेन्नई | 6:17 AM | 6:19 PM |
| कोलकाता | 5:47 AM | 5:45 PM |
| पुणे | 6:44 AM | 6:43 PM |
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यह तिथि क्यों?
Holika Dahan उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- गोबर के उपले(15-20)
- लकड़ी के लट्ठे और सूखी टहनियाँ
- साबुत नारियल (छिलके सहित)(1)
- सफ़ेद तिल
- नई फसल की गेहूँ की बालियाँ
पूजा के चरण
- 1
होलिका चिता निर्माण
त्योहार से कुछ दिन पहले गोबर के उपले, लकड़ी के लट्ठे और सूखी सामग्री एकत्र करें। खुले सामुदायिक क्षेत्र में एक बड़ी चिता...
- 2
पूजा स्थापना एवं आवाहन
प्रदोष काल में चिता के पास जल का लोटा रखें। थाली में कुमकुम, अक्षत, फूल, नारियल, तिल और अन्य सामग्री सजाएँ। घी का दीपक औ...
- 3
संकल्प एवं अग्नि को अर्पण
दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें। चिता पर अक्षत और कुमकुम अर्पित करें। साबुत नारियल, तिल, नई गेहूँ की बालियाँ और भुने ...
फल (लाभ)
होलिका दहन वर्ष भर में संचित सभी पापों, बुरे प्रभावों और नकारात्मकता का विनाश करता है। पवित्र अग्नि भक्त और वातावरण को शुद्ध करती है। यह शत्रुओं से रक्षा, भय से मुक्ति और भगवान नरसिंह का आशीर्वाद प्रदान करता है। यह अनुष्ठान आसुरी शक्तियों पर भक्ति की शाश्वत विजय का उत्सव है।
देवता
अग्नि देव, भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
होलिका दहन दैत्य बहन होलिका के दग्ध होने की स्मृति है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि से सुरक्षा का वरदान था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठी, पर वरदान अकेले बैठने पर ही काम करता था – ...पूरी कथा पढ़ें →
होलिका दहन दैत्य बहन होलिका के दग्ध होने की स्मृति है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि से सुरक्षा का वरदान था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठी, पर वरदान अकेले बैठने पर ही काम करता था – होलिका जल गई और प्रह्लाद अपनी अटल भक्ति से सुरक्षित बच गया।
कैसे मनाएँ
फाल्गुन पूर्णिमा को सूर्यास्त बाद शुभ मुहूर्त में सार्वजनिक स्थान पर विशाल अलाव जलाया जाता है। भक्त अग्नि की परिक्रमा करते हैं, नारियल, अनाज और लावा अग्नि में अर्पित करते हैं। कच्चा नारियल और नया अनाज भूनकर प्रसाद बनाया जाता है। लोग मन्त्र जपते हैं और पवित्र अग्नि की राख माथे पर लगाते हैं।
महत्व
होलिका दहन भक्ति की आसुरी शक्ति पर और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है। पवित्र अग्नि वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मकता को जलाती है। यह होली की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है – अगली सुबह रंगों का त्योहार आरम्भ होता है।