होलिका दहन 2028
होलिका दहन 2028 की सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त व शहर-वार समय
प्रमुख जानकारी
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 10 मार्च 2028
2028 पंचांग संदर्भ
वार
शुक्रवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
इस वर्ष होलिका दहन शुक्रवार को पड़ रहा है, 2027 (2027-03-21) से 10 दिन पहले — सामान्य चन्द्र-पंचांग बदलाव।
होलिका दहन 2028 — शहर-वार समय
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:36 AM | 6:26 PM |
| मुंबई | 6:50 AM | 6:46 PM |
| बेंगलुरु | 6:30 AM | 6:29 PM |
| चेन्नई | 6:19 AM | 6:18 PM |
| कोलकाता | 5:49 AM | 5:43 PM |
| पुणे | 6:46 AM | 6:42 PM |
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होलिका दहन — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- सूर्यास्त के बाद, प्रदोष + भद्रा-रहित काल में अग्नि प्रज्वलित करें।
- अग्नि की कम से कम सात बार परिक्रमा करें — प्रत्येक चक्र के लिए एक।
- भुने हुए धान्य, नारियल, एवं जिसका त्याग करना है उसका प्रतीक एक वस्तु अर्पित करें।
- नरसिंह मन्त्र का पाठ करें — प्रह्लाद-होलिका कथा के देवता।
न करें
- भद्रा काल में अग्नि न जलाएँ — स्पष्टतया अशुभ।
- आवश्यकता से अधिक बड़ी अग्नि न जलाएँ — पर्यावरण एवं सुरक्षा सम्बन्धी चिन्ता।
- अग्नि की धुएँ की दिशा में सीधे न खड़े हों — फेफड़ों के लिए हानिकारक।
- अगले दिन होली खेलने से पूर्व प्रातः स्नान न छोड़ें।
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आज रात्रि अग्नि उसे ग्रहण करती है जो वर्ष भर जीवित नहीं रहना चाहिए। उसे सही वस्तु अर्पित करने की ईमानदारी आपको प्राप्त हो। शुभ होलिका दहन।
रंगों के दिन से पूर्व अग्नि की रात्रि। एक काग़ज़ लें, जो जाना चाहिए वह लिखें, अग्नि में डालें। होलिका दहन की शुभकामनाएँ।
कुछ लकड़ियाँ, कुछ पड़ोसी, मार्च में प्रकाश का एक वृत्त। समुदाय का जो सरलतम रूप अब भी हमारे पास है। वह तपन आपको मिले।
होलिका ने जलने की सहमति दी थी — यह वह अंश है जो बच्चों की कथा छोड़ देती है। आपको इस वर्ष कथा को पूर्ण रूप से पढ़ने की परिपक्वता मिले।
अग्नि के पास इतनी देर बैठें कि आप भूल जाएँ कि किस वस्तु को त्यागने आए थे। फिर घर जाकर स्मरण करें।
होलिका दहन एवं होली — पर्व क्रम
फाल्गुन पूर्णिमा की होलिका दहन की रात्रि एवं अगले दिन रंगों की होली — मङ्गल-प्रधान विमुक्ति एवं नवीनीकरण का द्वि-दिवसीय क्रम।
होलिका दहन वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
यह तिथि क्यों?
Holika Dahan उदय तिथि नियम का पालन करता है – जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- गोबर के उपले(15-20)
- लकड़ी के लट्ठे और सूखी टहनियाँ
- साबुत नारियल (छिलके सहित)(1)
- सफ़ेद तिल
- नई फसल की गेहूँ की बालियाँ
पूजा के चरण
- 1
होलिका चिता निर्माण
त्योहार से कुछ दिन पहले गोबर के उपले, लकड़ी के लट्ठे और सूखी सामग्री एकत्र करें। खुले सामुदायिक क्षेत्र में एक बड़ी चिता...
- 2
पूजा स्थापना एवं आवाहन
प्रदोष काल में चिता के पास जल का लोटा रखें। थाली में कुमकुम, अक्षत, फूल, नारियल, तिल और अन्य सामग्री सजाएँ। घी का दीपक औ...
- 3
संकल्प एवं अग्नि को अर्पण
दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें। चिता पर अक्षत और कुमकुम अर्पित करें। साबुत नारियल, तिल, नई गेहूँ की बालियाँ और भुने ...
फल (लाभ)
होलिका दहन वर्ष भर में संचित सभी पापों, बुरे प्रभावों और नकारात्मकता का विनाश करता है। पवित्र अग्नि भक्त और वातावरण को शुद्ध करती है। यह शत्रुओं से रक्षा, भय से मुक्ति और भगवान नरसिंह का आशीर्वाद प्रदान करता है। यह अनुष्ठान आसुरी शक्तियों पर भक्ति की शाश्वत विजय का उत्सव है।
देवता
अग्नि देव, भगवान विष्णु
कथा एवं इतिहास
होलिका दहन दैत्य बहन होलिका के दग्ध होने की स्मृति है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि से सुरक्षा का वरदान था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठी, पर वरदान अकेले बैठने पर ही काम करता था – … पूरी कथा पढ़ें →कम दिखाएँ ↑
होलिका दहन दैत्य बहन होलिका के दग्ध होने की स्मृति है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को अग्नि से सुरक्षा का वरदान था। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठी, पर वरदान अकेले बैठने पर ही काम करता था – होलिका जल गई और प्रह्लाद अपनी अटल भक्ति से सुरक्षित बच गया।
कैसे मनाएँ
फाल्गुन पूर्णिमा को सूर्यास्त बाद शुभ मुहूर्त में सार्वजनिक स्थान पर विशाल अलाव जलाया जाता है। भक्त अग्नि की परिक्रमा करते हैं, नारियल, अनाज और लावा अग्नि में अर्पित करते हैं। कच्चा नारियल और नया अनाज भूनकर प्रसाद बनाया जाता है। लोग मन्त्र जपते हैं और पवित्र अग्नि की राख माथे पर लगाते हैं।
महत्व
होलिका दहन भक्ति की आसुरी शक्ति पर और सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है। पवित्र अग्नि वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मकता को जलाती है। यह होली की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है – अगली सुबह रंगों का त्योहार आरम्भ होता है।
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