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विष्णु सहस्रनाम विभिन्न हिन्दू परम्परासभमे, विशेषतः वैष्णव आ स्मार्त परम्परासभमे, अपार आध्यात्मिक महत्व रखैत अछि। भक्तगण द्वारा आध्यात्मिक पुण्य, संरक्षण आ धर्मसम्मत इच्छासभक पूर्तिक लेल परम्परानुसार एकर पाठ कएल जाइत अछि। ई स्तोत्रक उत्पत्ति महाभारतमे, जतय भीष्म युधिष्ठिरकेँ ई नामसभक उपदेश दैत छथि, परमसत्ताक स्वरूप आ मोक्षक मार्गक विषयमे परम शिक्षाक रूपमे एकर भूमिकाकेँ रेखांकित करैत अछि। एकर पाठ अत्यन्त फलदायी मानल जाइत अछि, विशेषतः एकादशीक दिन – चन्द्र पक्षक एकादशम दिन, जे भगवान विष्णुकेँ समर्पित अछि। गुरुवार, जे बृहस्पति (गुरु) आ भगवान विष्णुसँ सम्बन्धित अछि, सेहो एकर पाठ लेल शुभ मानल जाइत अछि। भक्तगण प्रायः वैकुण्ठ एकादशी, जन्माष्टमी आ दीपावली जेकाँ प्रमुख पर्वसभक अवसर पर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करबाक आ मनकेँ शुद्ध करबाक लेल एकर पाठ करैत छथि। सामान्यतः एक बेर, तीन बेर, एगारह बेर वा १०८ बेर एकर पाठ कएल जाइत अछि, प्रायः स्नान (स्नान) आ आचमन (आचमन) क'कय, तदनन्तर भगवान विष्णुकेँ स्वरूपक ध्यान (ध्यान) क'कय। सहस्रनामसँ मानल जाइत अछि जे ई कर्मक बोझकेँ कम करैत अछि, शारीरिक आ मानसिक कल्याणकेँ बढ़ावा दैत अछि, आ प्रयाससभमे सफलता प्रदान करैत अछि। ई ॐ नमो नारायणाय जेकाँ प्राथमिक मंत्रसभक पूरक अछि, देवताक गुणसभक विस्तृत चिन्तन प्रस्तुत क'कय भक्तक समझ आ सम्बन्धकेँ गहन करैत अछि। अनेक परिवार प्रतिदिन शान्ति आ समृद्धिक लेल एकर पाठ करैत छथि, ई मानैत जे ई सकारात्मक ऊर्जाक एक शक्तिशाली स्रोत अछि आ विपत्तिसभक विरुद्ध एक ढाल अछि, अन्ततः साधककेँ मोक्ष, अर्थात् आध्यात्मिक मुक्ति दिस अग्रसर करैत अछि।