मैसूर · Karnataka
अक्षय तृतीया 2025मैसूर मे
Exact puja times & muhurta computed for Mysore coordinates (12.30°N, 76.64°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Wednesday, April 30, 2025
सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
18:37
ई तिथि किएक?
मध्याह्न (दोपहर) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन मध्याह्न काल मे तृतीया तिथि रहैत अछि। अक्षय तृतीया पर प्रत्येक क्षण शुभ मानल जाइत अछि (स्वयंसिद्ध मुहूर्त), मुदा औपचारिक पूजा आ सोनाक खरीददारी आदर्श रूप सँ दोपहर मे कएल जाइत अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail at Madhyahna (midday). Used for festivals like Rama Navami and Ganesh Chaturthi.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- सोना वा चाँदीक वस्तु (छोट सेहो – सिक्का, अँगूठी, वा चेन)
- तुलसीक पात (पवित्र तुलसी)
- दानक वस्तुसभ (वस्त्र, भोजन, जलपात्र)
- विष्णु प्रतिमा वा चित्र
- लक्ष्मी प्रतिमा वा चित्र
पूजाक चरण
- 1
भोर – स्नान आ सङ्कल्प
भोर मे पवित्र स्नान करू। स्वच्छ पीयर वा उज्जर वस्त्र धारण करू। वेदीक सोझाँ बैसू आ अक्षय तृतीया पूजा तथा दान लेल औपचारिक ...
- 2
लक्ष्मी-विष्णु पूजा
पीयर वस्त्र सँ ढकल वेदी पर लक्ष्मी आ विष्णु केर मूर्ति वा चित्र राखू। चन्दन लेप, तुलसी पत्ता (विष्णु लेल), पीयर फूल, अक्...
- 3
विष्णु बीज मन्त्र जप
तुलसी माला सँ विष्णु बीज मन्त्र केर १०८ बेर जप करू। भगवान विष्णु केर स्वरूप पर ध्यान केन्द्रित करू आ अक्षय आशीर्वाद लेल ...
फल (लाभ)
अक्षय तृतीया हिन्दू पञ्चाङ्गक सबसँ पवित्र तिथि मे सँ एक अछि। एहि दिन कएल गेल कोनो पुण्य कार्य – दान, पूजा, जप, नव शुरुआत – अक्षय (अक्षय, कहियो समाप्त नहि होमयवला) फल दैत अछि। ब्रह्म पुराण कहैत अछि जे अक्षय तृतीया पर कएल गेल दान सब तीर्थक दानक बराबर होइत अछि। ई ओ दिन अछि जखन त्रेता युगक शुरुआत भेल छल, ओ दिन जखन गंगा पृथ्वी पर अवतरित भेल छलीह, आ ओ दिन जखन कुबेर केँ शिव सँ हुनकर धन प्राप्त भेल छल।
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, परशुराम
कथा आ इतिहास
अक्षय तृतीया — वैशाख शुक्ल तृतीया — स्वयंसिद्ध मुहूर्त मे सँ एक अछि: स्व-शुभ दिन जे मे हर क्षण कोनो शुभ कार्य कें लेल तैयार मानल जाइत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
अक्षय तृतीया — वैशाख शुक्ल तृतीया — स्वयंसिद्ध मुहूर्त मे सँ एक अछि: स्व-शुभ दिन जे मे हर क्षण कोनो शुभ कार्य कें लेल तैयार मानल जाइत अछि।
महाभारत कें पहिल कथा — महायुद्ध कें बाद व्यास एक लाख श्लोक मे ओकर वर्णन रचय कें संकल्प कयलनि। गणेश लेखनी बनेलनि अपन दाँत तोड़ि कय। महाभारत कें प्रथम श्लोक अक्षय तृतीया कें बोलल गेल।
दोसर कथा त्रेतायुग कें — सत्य सँ त्रेता कें सङ्क्रमण अक्षय तृतीया कें भेल। परशुराम जयन्ती सेहो ओही दिन।
तेसर कथा अक्षय पात्र कें — पाण्डव कें वनवास मे कृष्ण द्रौपदी कें असीमित भोजन कें पात्र देलखिन्ह। अन्नदान कें परम्परा।
चौथा कथा सुदामा कें — कृष्ण बिना माँगने हुनकर कुटिया कें महल बना देलखिन्ह। दिनक शिक्षा — जे दिअल जाइत अछि से लौटैत अछि।
पाँचम कथा कुबेर कें — शिव सँ धन कें स्वामित्व पाओल।
सोन खरीदय कें परम्परा अहीं सब सँ निकलल अछि, मुदा पुराण कें मुख्य बल अन्नदान पर अछि।
कनाय पालन करब
सोना, चाँदी या नयी सम्पत्ति खरीदें – इस दिन प्राप्त वस्तु अक्षय (अविनाशी) होती है। दान करें, अन्नदान करें। नए कार्य, निवेश या गृहप्रवेश आरम्भ करें।
महत्व
अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक है – प्रत्येक क्षण मुहूर्त है, अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त दिवस है।