अक्षय तृतीया 2028
अक्षय तृतीया 2028 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Thursday, April 27, 2028
2028 कें पंचांग संदर्भ
दिन
गुरुवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
This year Akshaya Tritiya falls on a Thursday, 10 days earlier than 2027 (2027-05-08) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Akshaya Tritiya 2028
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 5:43 AM | 6:53 PM |
| मुंबई | 6:12 AM | 6:59 PM |
| बेंगलुरु | 6:00 AM | 6:33 PM |
| चेन्नई | 5:49 AM | 6:23 PM |
| कोलकाता | 5:06 AM | 6:01 PM |
| पुणे | 6:09 AM | 6:54 PM |
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अक्षय तृतीया 2028 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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अक्षय तृतीया — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Make any auspicious purchase — gold being the traditional symbol of eternal value.
- Begin a new venture or major commitment — outcomes are said to multiply.
- Donate (anna-dana especially) — giving on this day returns infinitely.
- Perform Lakshmi-Narayana puja with rice and milk offerings.
न करें
- Do not lend money today — debts taken on Akshaya Tritiya are said to be unrepayable.
- Do not begin negative habits — they too become "akshaya" (inexhaustible).
- Avoid arguments or harsh words — sets a tone for the year ahead.
- Do not skip donating even a small amount — niggardliness today inverts the festival's blessing.
अक्षय तृतीया 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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Whatever you begin today is said to never run out. Wishing you the wisdom to begin something worth keeping. Shubh Akshaya Tritiya.
A small purchase of gold, a small commitment to a habit you want to keep — both work today. Akshaya Tritiya wishes.
"Akshaya" — the inexhaustible. Wishing you the discipline to deserve what doesn't run out.
A small donation made today returns endlessly. Wishing you the wisdom to give to someone whose name you will not remember tomorrow.
May whatever you start today never run out. Akshaya Tritiya is the festival of the first step that keeps walking.
अक्षय तृतीया वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
मध्याह्न (दोपहर) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन मध्याह्न काल मे तृतीया तिथि रहैत अछि। अक्षय तृतीया पर प्रत्येक क्षण शुभ मानल जाइत अछि (स्वयंसिद्ध मुहूर्त), मुदा औपचारिक पूजा आ सोनाक खरीददारी आदर्श रूप सँ दोपहर मे कएल जाइत अछि।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail at Madhyahna (midday). Used for festivals like Rama Navami and Ganesh Chaturthi.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- सोना वा चाँदीक वस्तु (छोट सेहो – सिक्का, अँगूठी, वा चेन)
- तुलसीक पात (पवित्र तुलसी)
- दानक वस्तुसभ (वस्त्र, भोजन, जलपात्र)
- विष्णु प्रतिमा वा चित्र
- लक्ष्मी प्रतिमा वा चित्र
पूजाक चरण
- 1
भोर – स्नान आ सङ्कल्प
भोर मे पवित्र स्नान करू। स्वच्छ पीयर वा उज्जर वस्त्र धारण करू। वेदीक सोझाँ बैसू आ अक्षय तृतीया पूजा तथा दान लेल औपचारिक ...
- 2
लक्ष्मी-विष्णु पूजा
पीयर वस्त्र सँ ढकल वेदी पर लक्ष्मी आ विष्णु केर मूर्ति वा चित्र राखू। चन्दन लेप, तुलसी पत्ता (विष्णु लेल), पीयर फूल, अक्...
- 3
विष्णु बीज मन्त्र जप
तुलसी माला सँ विष्णु बीज मन्त्र केर १०८ बेर जप करू। भगवान विष्णु केर स्वरूप पर ध्यान केन्द्रित करू आ अक्षय आशीर्वाद लेल ...
फल (लाभ)
अक्षय तृतीया हिन्दू पञ्चाङ्गक सबसँ पवित्र तिथि मे सँ एक अछि। एहि दिन कएल गेल कोनो पुण्य कार्य – दान, पूजा, जप, नव शुरुआत – अक्षय (अक्षय, कहियो समाप्त नहि होमयवला) फल दैत अछि। ब्रह्म पुराण कहैत अछि जे अक्षय तृतीया पर कएल गेल दान सब तीर्थक दानक बराबर होइत अछि। ई ओ दिन अछि जखन त्रेता युगक शुरुआत भेल छल, ओ दिन जखन गंगा पृथ्वी पर अवतरित भेल छलीह, आ ओ दिन जखन कुबेर केँ शिव सँ हुनकर धन प्राप्त भेल छल।
देवता
भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, परशुराम
कथा आ इतिहास
अक्षय तृतीया — वैशाख शुक्ल तृतीया — स्वयंसिद्ध मुहूर्त मे सँ एक अछि: स्व-शुभ दिन जे मे हर क्षण कोनो शुभ कार्य कें लेल तैयार मानल जाइत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
अक्षय तृतीया — वैशाख शुक्ल तृतीया — स्वयंसिद्ध मुहूर्त मे सँ एक अछि: स्व-शुभ दिन जे मे हर क्षण कोनो शुभ कार्य कें लेल तैयार मानल जाइत अछि।
महाभारत कें पहिल कथा — महायुद्ध कें बाद व्यास एक लाख श्लोक मे ओकर वर्णन रचय कें संकल्प कयलनि। गणेश लेखनी बनेलनि अपन दाँत तोड़ि कय। महाभारत कें प्रथम श्लोक अक्षय तृतीया कें बोलल गेल।
दोसर कथा त्रेतायुग कें — सत्य सँ त्रेता कें सङ्क्रमण अक्षय तृतीया कें भेल। परशुराम जयन्ती सेहो ओही दिन।
तेसर कथा अक्षय पात्र कें — पाण्डव कें वनवास मे कृष्ण द्रौपदी कें असीमित भोजन कें पात्र देलखिन्ह। अन्नदान कें परम्परा।
चौथा कथा सुदामा कें — कृष्ण बिना माँगने हुनकर कुटिया कें महल बना देलखिन्ह। दिनक शिक्षा — जे दिअल जाइत अछि से लौटैत अछि।
पाँचम कथा कुबेर कें — शिव सँ धन कें स्वामित्व पाओल।
सोन खरीदय कें परम्परा अहीं सब सँ निकलल अछि, मुदा पुराण कें मुख्य बल अन्नदान पर अछि।
कनाय पालन करब
सोना, चाँदी या नयी सम्पत्ति खरीदें – इस दिन प्राप्त वस्तु अक्षय (अविनाशी) होती है। दान करें, अन्नदान करें। नए कार्य, निवेश या गृहप्रवेश आरम्भ करें।
महत्व
अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर के सबसे शुभ दिनों में से एक है – प्रत्येक क्षण मुहूर्त है, अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त दिवस है।
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