सिंगापुर · Singapore
भाई दूज 2027सिंगापुर मे
Exact puja times & muhurta computed for Singapore coordinates (1.35°N, 103.82°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Saturday, October 30, 2027
सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
18:50
ई तिथि किएक?
Bhai Dooj follows the Aparahna (Afternoon) rule. The tithi must be active during the Aparahna (Afternoon) window for the festival to be observed on that day. When the tithi spans two calendar days, the Dharmasindhu tie-breaking rules determine the correct observance date.
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail during Aparahna (afternoon). Used for festivals like Dussehra.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- रोली / कुमकुम (सिन्दूर)
- अक्षत (अखण्ड चावल)
- दीपक (तेल/घीक दीप)
- आरतीक थाली
- मिठाई
पूजाक चरण
- 1
तैयारी
भाई आ बहिन दुनू स्नान कय नब वस्त्र धारण करथि. बहिन आरतीक थाली रोली, अक्षत, दीया, मिठाई, फूल आ नारियल सँ तैयार करथि. पूजा...
- 2
आसन ग्रहण आ आह्वान
भाई पूब दिस मुँह कय कय एकटा स्वच्छ आसन पर बैसथि. बहिन हुनकर सोझाँ बैसथि. दीया जराबू आ यम आ यमुनाक आशीर्वादक आह्वान करू, ...
- 3
तिलक समारोह
बहिन अपन अनामिका (अंगुरी) सँ भाईक कपार पर रोली (कुंकुम) कऽ तिलक लगाबथि. फेर ओ तिलक पर अक्षत (चाउर) राखथि. ओ हुनकर माथ पर...
फल (लाभ)
भाई दूज भाईकेँ यमक सुरक्षा प्रदान करैत अछि, दीर्घायु आ अकाल मृत्युसँ मुक्ति सुनिश्चित करैत अछि। बहिनकेँ यमुना पूजाक समान पुण्य प्राप्त होइत अछि। भाई-बहिनक सम्बन्ध पवित्र आ जीवन भरि लेल मजबूत होइत अछि।
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
यमराज, यमुना
कथा आ इतिहास
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। ए… पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
भाई दूज यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा पर आधारित है। यमुना ने यमराज का आरती, तिलक और भोज से स्वागत किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक पाने वाला भाई अकाल मृत्यु से मुक्त रहेगा। एक अन्य परम्परा कृष्ण-सुभद्रा मिलन से जुड़ी है।
कनाय पालन करब
बहनें भाई के मस्तक पर कुमकुम, चावल और चन्दन का तिलक लगाएँ, आरती करें और दीर्घायु की कामना करें। भाई उपहार और मिठाइयाँ दें। विशेष पकवान बनाएँ।
महत्व
भाई दूज भाई-बहन के पवित्र बन्धन का उत्सव है। यह दीपावली का पाँचवाँ और अन्तिम दिन है। बहन का आशीर्वाद यम को भी दूर रखने में समर्थ माना जाता है।