दशहरा 2029
दशहरा 2029 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Tuesday, October 16, 2029
Vijay Muhurat (Aparahna) (दिल्ली)
2:02 PM – 2:46 PM
2029 कें पंचांग संदर्भ
दिन
मंगलवार
विक्रम संवत्
2086
शक संवत्
1951
This year Dussehra falls on a Tuesday, 18 days later than 2028 (2028-09-28) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Dussehra 2029
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | पूजा मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 6:22 AM | 5:50 PM | 2:02 PM – 2:46 PM |
| मुंबई | 6:32 AM | 6:15 PM | 2:22 PM – 3:06 PM |
| बेंगलुरु | 6:10 AM | 6:00 PM | 2:05 PM – 2:48 PM |
| चेन्नई | 5:59 AM | 5:49 PM | 1:54 PM – 2:38 PM |
| कोलकाता | 5:33 AM | 5:10 PM | 1:20 PM – 2:03 PM |
| पुणे | 6:28 AM | 6:11 PM | 2:19 PM – 3:02 PM |
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दशहरा 2029 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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दशहरा — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Worship weapons, tools, and vehicles (Shastra Puja / Ayudha Puja) at the workplace.
- Cross a Shami tree (or shami branch) — symbolic of victorious return like the Pandavas.
- Begin a new venture, contract, or skill today — Vijayadashami is the most auspicious day to start anything.
- Light a victory lamp at sunset and exchange shami/apta leaves as gold-equivalent gifts.
न करें
- Do not initiate quarrels or hold grudges today — defeats the purpose of conquering Ravana within.
- Do not consume non-vegetarian food during the daytime puja.
- Avoid wearing all-black clothing today — bright/festive colors are traditional.
- Do not borrow money or start a financial loan today — start in your own strength.
दशहरा 2029 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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On the tenth day, the ten heads burn. Whatever Ravana you have been polite to inside yourself, may today be the day. Shubh Dussehra.
Shami leaves in the pocket, sword in the imagination only, and a long evening with whoever you love. Vijayadashami wishes.
Victory is what you decide to do the day after. Wishing you the eleventh-day Dussehra — the one where you actually change.
A small Shastra Puja at your desk — a pen, a screen, the tool you actually use to fight the world. Vijayadashami wishes for the right weapon.
Shami leaf to your father, an apta to your sister, kind words to your mother. The festival is older than the legend says.
नवरात्रि एवं दशहरा — पर्व क्रम
Nine nights of Devi worship — one form of the Goddess per day — culminating in Vijaya Dashami (Dussehra), the victory of Rama over Ravana.
- 01Day 1 — Shailaputriशीघ्र आ रहा है
- 02Day 2 — Brahmachariniशीघ्र आ रहा है
- 03Day 3 — Chandraghantaशीघ्र आ रहा है
- 04Day 4 — Kushmandaशीघ्र आ रहा है
- 05Day 5 — Skandamataशीघ्र आ रहा है
- 06Day 6 — Katyayaniशीघ्र आ रहा है
- 07Day 7 — Kalaratriशीघ्र आ रहा है
- 08Day 8 — Mahagauri (Ashtami)शीघ्र आ रहा है
- 09Day 9 — Siddhidatri (Navami)शीघ्र आ रहा है
- 10Dussehraदेखें
दशहरा वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Dussehra follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- शमी गाछक पात
- अपराजिता फूल (नील बटरफ्लाई पी)
- अक्षत (अखण्ड चावल)
- शस्त्र पूजाक लेल शस्त्र/औजार
- रामायण (पोथी)
पूजाक चरण
- 1
तैयारी
पूजा स्थानकेँ साफ करू। भगवान राम आ/वा देवी दुर्गाक चित्र स्थापित करू। शमीक पात, अपराजिता फूल जमा करू, आ शस्त्र पूजा लेल ...
- 2
शमी पूजा
शमी गाछक पूजा करू (वा वेदी पर राखल ओकर पातकेँ)। शमीक पातकेँ कुमकुम, अक्षत आ फूल चढ़ाऊ। शमी गाछक पूजा कएल जाइत अछि किएक त...
- 3
अपराजिता पूजा
देवी अपराजिता (अजेय) क पूजा करू नीला अपराजिता फूल, चन्दनक लेप आ कुमकुम सँ। अपराजिता मन्त्रक जप करू। ओ अजेयता आ सफलता प्र...
फल (लाभ)
शत्रु आ बाधाहरू पर विजय, धर्मक अधर्म पर विजय, एहि दिन शुरू कएल गेल सभ नव कार्यसभमे सफलता, सभ औजार आ उपकरणक शुद्धिकरण आ सशक्तिकरण, आ अजेयताक लेल राम आ अपराजिताक आशीर्वाद।
देवता
भगवान राम / देवी दुर्गा
कथा आ इतिहास
दशहरा — विजयादशमी, "विजय कें दसम दिन" — आश्विन शुक्ल दशमी कें नवरात्रि कें तुरन्त बाद पड़ैत अछि। यह ओहि तिथि अछि जे पर हिन्दू पञ्चाङ्ग कें दू प्रिय संस्कृत महाकाव्य एक संग अबैत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
दशहरा — विजयादशमी, "विजय कें दसम दिन" — आश्विन शुक्ल दशमी कें नवरात्रि कें तुरन्त बाद पड़ैत अछि। यह ओहि तिथि अछि जे पर हिन्दू पञ्चाङ्ग कें दू प्रिय संस्कृत महाकाव्य एक संग अबैत अछि।
वाल्मीकि रामायण ओहि दिन कें लङ्का कें महायुद्ध कें चरम घड़ी पर रखैत अछि। राम अन्ततः रावण सँ भिड़ैत छथि। रावण साधारण असुर नहि छल — महान शिव-भक्त, वेद-पंडित, संगीत-स्वामी, आ भीषण क्षत्रिय योद्धा। ओकर एक दोष छल — हरण कें बाद सीता कें छोड़य मे असमर्थता। राम एक शिर काटैत छथि त दोसर उगि अबैत अछि। विभीषण रहस्य कहैत छथि — रावण कें नाभि मे अमृत अछि। राम अगस्त्य-दत्त ब्रह्मास्त्र छोड़ैत छथि; बाण नाभि भेदि कय सूर्यास्त पर रावण कें अन्त करैत अछि।
मार्कण्डेय पुराण कें देवी माहात्म्य ओही दिन दुर्गा द्वारा महिषासुर-वध कें दिन रखैत अछि।
तेसर कथा महाभारत सँ — पाण्डव अज्ञातवास कें अन्त मे शमी-वृक्ष सँ अपन दिव्य अस्त्र निकालि कय पूजलनि। शस्त्र-पूजा आ शमी (आपटा) पात कें स्वर्ण रूप मे बाँटय कें परम्परा।
चौथा ऐतिहासिक — विजयनगर, मैसूर, मराठा, बङ्गाल कें परम्परा।
रावण कें दस शिर दस आन्तरिक शत्रु कें प्रतीक — काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य, अहङ्कार, अन्याय, अनुताप, अमानवता।
कनाय पालन करब
रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले जलाएँ। शस्त्र पूजा करें। आपटा पत्ते (सोने का प्रतीक) बाँटें। बंगाल में दुर्गा विसर्जन होता है।
महत्व
विजयादशमी – "विजय का दसवाँ दिन"। नए कार्य आरम्भ करने का सर्वाधिक शुभ दिन। रावण दहन दस दुर्गुणों के नाश का प्रतीक है।
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