तंजावुर · Tamil Nadu
रक्षाबन्धन 2030तंजावुर मे
Exact puja times & muhurta computed for Thanjavur coordinates (10.79°N, 79.14°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Tuesday, August 13, 2030
सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
18:33
ई तिथि किएक?
Raksha Bandhan follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- राखी (पवित्र धागा)
- रोली / कुमकुम (सिन्दूर)
- अक्षत (अखण्डित चावल)
- दीपक (तेल/घीक दीप)
- मिश्री
पूजाक चरण
- 1
आरतीक थालीक तैयारी
बहिन जरैत दीया, रोली, अक्षत, मिश्री, एकटा फूल आ राखीक संग आरतीक थाली तैयार करैत अछि। दुनू भाई आ बहिनकेँ स्नान करबाक चाही...
- 2
भाईक आरती
बहिन जरैत दीयाक थालीकेँ भाईक मुँहक चारू कात तीन बेर दक्षिणावर्त घुमा कय हुनकर आरती करैत अछि।
- 3
कपार पर तिलक
बहिन अनामिका अँगुरिसँ भाईक कपार पर रोलीक तिलक लगबैत अछि, फेर तिलक पर अक्षत (चाउर) रखैत अछि। ई हुनका शुभ आशीर्वादसँ चिह्न...
फल (लाभ)
भाई-बहिनक पवित्र बन्धनकेँ मजबूत करैत अछि, भाइक दीर्घायु आ समृद्धि सुनिश्चित करैत अछि, दुनू भाई-बहिनकेँ दैवी सुरक्षा प्रदान करैत अछि, आ कुलक आशीर्वादकेँ आह्वान करैत अछि।
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
लक्ष्मी / कृष्ण
कथा आ इतिहास
रक्षा बन्धन — रक्षा-सूत्र बान्ह कें पर्व — श्रावण पूर्णिमा कें मनायल जाइत अछि, आ एकर अर्थ कें अनेक भिन्न परम्परा अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
रक्षा बन्धन — रक्षा-सूत्र बान्ह कें पर्व — श्रावण पूर्णिमा कें मनायल जाइत अछि, आ एकर अर्थ कें अनेक भिन्न परम्परा अछि।
सबसँ प्राचीन परत वैदिक-पौराणिक रक्षा-सूत्र अछि: एक पवित्र धागा कलाई पर बान्हल जाइत अछि आ मन्त्र पढ़ल जाइत अछि — "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल॥" यह प्राचीन रूप भाइ-बहीन सँ आवश्यक रूप सँ सम्बद्ध नहि अछि — यह स्वयं देवता कें रक्षा-गाँठ अछि।
भागवत पुराण ओहि मन्त्र कें पाछाँ कें कथा दैत अछि। विष्णु वामन अवतार मे तीन पग चलि कय राजा बलि कें सुतल लोक मे दबा देलखिन्ह — मुदा बलि कें उदारता सँ प्रसन्न भय हुनकर द्वारपाल बनय कें वचन देलखिन्ह। वैकुण्ठ मे लक्ष्मी पति-वियोग सँ व्याकुल भेलि आ श्रावण पूर्णिमा कें ब्राह्मणी कें वेश मे सुतल पधारलि।
महाभारतीय परत आइ सबसँ जीवन्त अछि। युद्ध मे कृष्ण कें औंगुर चक्र सँ कटि गेल; द्रौपदी अपन साड़ी कें आँचल फाड़ि कय घाव बान्हलनि। कृष्ण ओकर वस्त्र कें अनन्त वस्त्र सँ प्रत्युत्तर देबय कें वचन देलखिन्ह — जे कौरव सभा मे चीर-हरण कें समय निभाओल गेल।
मध्यकालीन इतिहास सँ तेसर परत अबैत अछि — मेवाड़ कें रानी कर्णावती हुमायूँ कें रक्षा-सूत्र भेजने छलथि।
आइ मनायल जाय वाला पर्व ताहि सब अर्थ एक संग धारण करैत अछि।
कनाय पालन करब
बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा का वचन देते हैं।
महत्व
भाई-बहन के पवित्र बन्धन और रक्षा के कर्तव्य का उत्सव।