उगादि 2027
उगादि 2027 का पर्व बुधवार, Wednesday, April 7, 2027. तिथि: chaitra shukla 1.
उगादि 2027 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Wednesday, April 7, 2027
2027 कें पंचांग संदर्भ
दिन
बुधवार
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
This year Ugadi falls on a Wednesday, 19 days later than 2026 (2026-03-19) — typical lunar-calendar drift.
Falling on a Wednesday gives the day a Budha emphasis — learning-related rites and green offerings carry extra weight, traditionally favourable for new study.
The 2026 observance fell on Thursday, 2026-03-19 — this year arrives 19 days later in the Gregorian calendar, the Adhika-masa pattern when an intercalary lunar month pushes the cycle forward.
Looking ahead to 2028, Ugadi will fall on Monday, 2028-03-27 (10 days earlier than this year). So planning ritual schedules across years means anchoring to the tithi rather than the Gregorian date.
Astronomical context for Ugadi 2027
On Wednesday, April 7, 2027, sunrise in Delhi (the reference city for this page) falls at 06:05 IST and sunset at 18:42 IST — a daylight span of 12h 37m. Across the six pan-Indian cities tabulated below, sunrise on this date varies from 05:24 (Kolkata) at the eastern edge to 06:28 (Mumbai) in the west — a 64-minute difference that drives the city-by-city muhurat shift you see in the table.
For Ugadi 2027, the central rite of udaya tithi (sunrise) depends on the Chaitra Shukla 1 being present during that window on 2027-04-07 — confirmed across 6 reference cities in this year's computation pass. Cities further east (Kolkata, Chennai) see the window open ~15-25 minutes before Delhi; cities west of Delhi (Mumbai, Pune, Bangalore) see it start later by a similar margin.
City-Wise Timings for Ugadi 2027
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 6:05 AM | 6:42 PM |
| मुंबई | 6:28 AM | 6:53 PM |
| बेंगलुरु | 6:12 AM | 6:31 PM |
| चेन्नई | 6:01 AM | 6:20 PM |
| कोलकाता | 5:24 AM | 5:53 PM |
| पुणे | 6:24 AM | 6:49 PM |
ई तिथि किएक?
Ugadi follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
पूजाक चरण
- 1
अभ्यङ्ग स्नान (तेल स्नान)
सूर्योदय सँ पहिने, शरीर आ माथ पर गरम तिलक तेल लगाउ। कम सँ कम १५ मिनट धरि नीक जकाँ मालिश करू। फेर गरम पानिक स्नान करू। ई ...
- 2
आमक पात केर तोरण आ घरक सजावट
घरक मुख्य द्वार पर आमक पात केर ताज़ा तोरण (बन्दनवार) बान्हू। ई उगादिक एकटा आवश्यक परम्परा अछि जे समृद्धि आ नव शुरुआतक प्...
- 3
बेवु-बेल्ला वितरण (छह स्वाद)
उगादि पचड़ी तैयार करू – एकटा विशेष पकवान जाहिमे जीवनक छह भावनाक प्रतीक छह स्वाद (षडरस) होइत अछि। नीम फूल/पात (कड़ुआ – दु...
फल (लाभ)
रचनात्मक ऊर्जा आ नव शुरुआतक लेल भगवान ब्रह्माक आशीर्वाद। पूरा वर्ष रक्षा आ पालन-पोषणक लेल भगवान विष्णुक आशीर्वाद। जीवनक सुख-दुःखक सामना करबामे समभाव (जेना बेवु-बेल्ला द्वारा सिखाओल गेल अछि)। पञ्चाङ्ग श्रवणक माध्यमसँ वर्षक खगोलीय प्रभावक ज्ञान। समृद्धि, नीक स्वास्थ्य आ सामंजस्यपूर्ण पारिवारिक जीवन।
देवता
ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता)
कथा आ इतिहास
उगादि — शाब्दिक अर्थ अछि "एक युगक आरम्भ" (युग + आदि) — आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आ कर्नाटक (जतय एहि पर्वकेँ युगादि कहल जाइत अछि) मे मनाओल जाइवला एकटा चंद्र-सौर नव वर्ष अछि। ई पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, प… पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
उगादि — शाब्दिक अर्थ अछि "एक युगक आरम्भ" (युग + आदि) — आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आ कर्नाटक (जतय एहि पर्वकेँ युगादि कहल जाइत अछि) मे मनाओल जाइवला एकटा चंद्र-सौर नव वर्ष अछि। ई पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, पहिल चंद्र मासक शुक्ल पक्षक पहिल दिन पड़ैत अछि, आ ई ओ पंचांगीय धुरी अछि जाहि पर घरक वर्ष स्पष्ट रूपसँ आरम्भ होइत अछि।
ब्रह्म पुराण एहि क्षणमे सृष्टिक स्थापना करैत अछि। प्रत्येक कल्पक अंत करयवला महान प्रलयक बाद, ब्रह्मा विष्णु नाभिसँ उठैत कमल पर बैसल जागृत भेलाह आ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नव सृष्टिक कार्य आरम्भ केलनि — पहिल आकाश, पहिल पृथ्वी, जलक पहिल विभाजन, समयक पहिल माप। वेदांग ज्योतिष ग्रंथसभक मानब अछि जे एहि क्षणमे ग्रहसभकेँ पहिल बेर अपन गति प्राप्त भेल छल: सूर्य, चंद्रमा, आ पाँच दृश्य ग्रह (मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि) एहि दिन सूर्योदयक समय नाक्षत्र राशिचक्रक शून्य बिंदु पर संरेखित छलाह। अतः उगादि केवल एकटा कैलेंडर वर्षक शुरुआत नहि अछि, बल्कि स्वयं ब्रह्मांडीय समयक शुरुआतक एकटा पुनरभिनय अछि।
दोसर परत शालिवाहनसँ संबंधित अछि। कन्नड़ आ तेलुगु शालिवाहन शक संवत् — जे कैलेंडरसँ दक्षिणी घरसभ वास्तवमे गणना करैत अछि — ७८ ईस्वीमे महान सातवाहन राजा शालिवाहन द्वारा प्रतिष्ठान (आधुनिक पैठन, महाराष्ट्र) मे हुनकर राज्याभिषेकक दिन स्थापित कएल गेल छल, जे शकसभ पर हुनकर विजयक स्मरण कराबैत अछि। उगादि पर शुरू होइवला वर्षकेँ संवत्सरसभक ६०-वर्षीय चक्रसँ अपन नाम प्राप्त होइत अछि — प्रभाव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरस, … क्षय धरि, प्रत्येक नाम अपन शुभ वा सावधानीपूर्ण चरित्र रखैत अछि। कोन संवत्सरक अंतर्गत वर्ष पड़ैत अछि, ई जानब पहिल चीज अछि जे मंदिरक पुजारी पंचांग श्रवणमे घोषित करैत छथि — जे पर्वक केंद्रीय अनुष्ठान अछि, वर्षक आगाक पाठ।
पर्वक प्रतीकात्मक तैयारी अछि उगादि पचड़ी — ठीक छह सामग्रीसँ बनल एकटा चटनी, प्रत्येक जीवनक छह रससभ (स्वादसभ) मे सँ एकटाक प्रतिनिधित्व करैत अछि: नीम फूल (कड़ुआ, दुखक लेल), कच्चा आम (कसैला, अपरिचितक लेल), इमली (खट्टा, अप्रियताक लेल), नून (आधारभूत आ आवश्यकक लेल), हरियर मिर्च वा मरिच (तीखा, क्रोध आ तीव्रताक लेल), आ गुड़ (मीठ, आनंदक लेल)। पचड़ी पंचांग पाठक बाद खाएल जाइवला पहिल चीज अछि — आ ई जे सिद्धांत रखैत अछि, ओ स्पष्ट अछि: आगाक वर्षमे सभ छह स्वाद रहत, घर ई जानि कऽ एकरा शुरू करैत अछि, आ वर्षक पहिल कार्य अछि एहि तथ्यकेँ स्वयं शरीरमे स्वीकार करब। कोनो रसहीन जीवन नहि अछि; उगादि घर ई बहानाकेँ अस्वीकार करैत अछि जे वर्ष पूर्ण रूपसँ मीठ होयत।
कनाय पालन करब
भोरसँ पहिने तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) आ नव वस्त्र। आमक पातसँ बनल तोरण (ताजा आमक पातसभक माला) सँ सजाओल गेल दरवाजा आ देहरी पर एकटा ताजा कोलम। पंचांग श्रवणक लेल मंदिरक यात्रा — पुजारी वर्षक पंचांगकेँ जोरसँ पढ़ैत छथि, संवत्सरक नाम आ वर्षक पाँच अंगसभ (तिथि-प्रवाह, नक्षत्र-शक्ति, योग-चरित्र, दिन-मास-वर्षक ग्रहीय स्वामी) मे व्यापक भविष्यवाणीक घोषणा करैत छथि। उगादि पचड़ी — छह स्वादक चटनी — क तैयारी आ पहिल भोजनक रूपमे एकर सेवन। उगादि भोजनम (उत्सव भोज) लेल पारिवारिक जुटान जाहिमे पुलिहोरा (इमलीक भात), बोब्बट्लु / होलिगे (मीठ भरल रोटी), आ मौसमी तरकारी रहैत अछि। ई दिन आंध्र प्रदेशक स्थानीय मंदिरमे एकटा काव्य पाठ — कवि सम्मेलन — सँ समाप्त होइत अछि, जतय वर्षक पहिल पद रचल आ सार्वजनिक रूपसँ पाठ कएल जाइत अछि।
महत्व
उगादि वर्षकेँ एकटा पूर्ण घटनाक रूपमे घरक औपचारिक स्वीकृति अछि, केवल एकर मीठ भाग नहि। पचड़ीक छह रस — कड़ुआ, कसैला, खट्टा, नमकीन, तीखा, मीठ — नव वर्षक भोरमे एक संग, एकटा निवालामे, जानि-बूझि कऽ खाएल जाइत अछि: परिवार शरीरमे स्वीकार करैत अछि, आगाक माससभक लेल कोनो इच्छा बनयसँ पहिने, जे वर्षमे सभ छहटा रहत आ कोनो एकटाक बिना वर्षमे रहबाक कोनो उपाय नहि अछि। पंचांग श्रवण एहि समान शिक्षाकेँ एकटा भिन्न रूपमे प्रस्तुत करैत अछि: वर्षक गतिविधि सभकेँ शुरुआतमे सार्वजनिक कएल जाइत अछि, घर ओकरा सुनैत अछि, आ घर आश्चर्यचकित होयबाक बजाय सूचित भऽ कऽ वर्षमे प्रवेश करैत अछि। एक संग, ई दूटा अनुष्ठान उगादिक विशिष्ट ब्रह्मांड विज्ञानकेँ फ्रेम करैत अछि — नव वर्ष एकटा उपहार नहि अछि जे खोलबाक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि, बल्कि आँखि खोलि कऽ कएल गेल एकटा पूर्ण धार्मिक संलग्नता अछि। ई पर्व ओ पंचांगीय संकेतक सेहो अछि जे ब्रह्मांडीय घड़ी अपन अगिला ३६०-दिवसीय घुमाव शुरू कऽ देलक अछि: ब्रह्म पुराणक विवरण एहि भोरमे सृष्टिक स्थापना करैत अछि, आ घर पचड़ी आ पंचांगक अनुष्ठानकेँ दोहरा कऽ अपन रसोई आ देहरीक स्तर पर समयक नवीकरणमे भाग लऽ रहल अछि।
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