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8 गौरी काल, साप्ताहिक क्रम और दैनिक समय-निर्धारण में उपयोग
गौरी पंचांग दक्षिण भारत में प्रचलित वैदिक समय-विभाजन प्रणाली है जो प्रत्येक दिन और रात को लगभग 90 मिनट की 8 बराबर अवधियों में बाँटती है।
8 काल इस क्रम में चलैत अछि: अमृत, सिद्ध, मरण, रोग, लाभ, धन, सुगम, शोक।
प्रत्येक वार अलग स्थान से प्रारम्भ करैत अछि।
| वार | पहला गौरी |
|---|---|
| रविवार | शोक |
| सोमवार | अमृत |
| मंगलवार | मरण |
| बुधवार | लाभ |
| गुरुवार | सुगम |
| शुक्रवार | सिद्ध |
| शनिवार | रोग |
नया व्यापार आरम्भ कें लेल अमृत; वित्तीय निर्णय कें लेल लाभ; यात्रा कें लेल सुगम।
लाभ, धन
सुगम, अमृत
अमृत, सिद्ध
राहु काल, यमगण्ड, या गुलिक काल में अमृत गौरी हो तो भी सावधानी बरतें — अशुभ आवरण प्राथमिकता पर है।
दूनू प्रणाली समान काल-विभाजन संरचना साझा करैत अछि, मुदा काल-नाम आ चक्र अलग।