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चतुर्मुखयोगः
निर्माण नियम
प्रत्येक ४ केन्द्र (पहिल, चारिम, सातम, दसम) मे शुभ ग्रह
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
चतुर्मुख योग — अत्यन्त सौभाग्यशाली, चारू दिशा मे यश, धर्म प्रति भक्ति, शास्त्रीय ग्रन्थक अनुसार ९६ वर्षसँ अधिक दीर्घायु।
परम सौभाग्य
चारू दिशा मे यश, दीर्घायु, परम सौभाग्य।
ई योग सामान्यतः महत्वपूर्ण सार्वजनिक पहचान आ प्रभावसँ भरल जीवन प्रदान करैत अछि। व्यक्तिमे प्रायः सन्तुलित स्वभाव, सुदृढ़ नैतिक आधार, आ विभिन्न क्षेत्रमे नेतृत्व करबाक वा प्रेरित करबाक स्वाभाविक क्षमता देखल जाइत अछि। हुनक करियरक मार्ग स्थिर आ प्रगतिशील होइत अछि, प्रायः अधिकारक पद वा व्यापक प्रशंसा धरि पहुँचैत अछि, संगहि उत्तम स्वास्थ्य आ दीर्घायु सेहो बनल रहैत अछि।
एहि योगक फल सामान्यतः केन्द्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम भाव) मे स्थित शुभ ग्रहसभक दशा वा अन्तर्दशा कालमे प्रकट होइत अछि। लग्नक स्वामी वा दशम भावक स्वामीक दशामे सेहो एकर सक्रियता प्रबल होइत अछि।