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चतुःसागरयोगः
निर्माण नियम
चारू केन्द्र (१, ४, ७, १०) ग्रहोंसँ व्याप्त
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
चतुःसागर (चारि समुद्र) योग तखन बनैत अछि जखन चारू केन्द्र भाव ग्रहोंसँ व्याप्त होथि। ई एकटा शक्तिशाली संयोग अछि जे पृथ्वीकें घेरनिहार चारि समुद्रक समान चारू दिशामे यशक प्रसारक संकेत दैत अछि। जातक अपन तात्कालिक परिवेशसँ बहुत आगाँ धरि सम्मान अर्जित करैत छथि।
व्यापक यश
चारू दिशामे यश, अन्तर्राष्ट्रीय पहचान, समुदायोंमे आदर।
चतुस्सागर योगवला जातक प्रायः महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रभावक पदसभमे रहैत छथि, अपन चुनल गेल क्षेत्रमे, कहियो काल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सेहो, व्यापक मान्यता प्राप्त करैत छथि। हुनकर करियरक दिशा नेतृत्व वा व्यापक संचार आ सम्मानक आवश्यकतावला भूमिकासभ दिस होइत छैक। ओ सहजतासँ अधिकारकें नियंत्रित करैत छथि, यद्यपि हुनकर व्यापक ध्यानक कारण व्यक्तिगत संबंध हुनकर सार्वजनिक व्यक्तित्वक तुलनामे गौण भऽ सकैत छथि।
चतुस्सागर योगक प्रभाव सामान्यतः केन्द्र भाव (१, ४, ७, १०) मे स्थित ग्रहसभक दशा आ अन्तर्दशा कालमे प्रबल रूपसँ प्रकट होइत अछि। केन्द्रक स्वामीसभक कालमे सेहो एकर सक्रियता होइत अछि, जे व्यापक पहचान आनैत अछि।