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गुरुमङ्गलयोगः
निर्माण नियम
बृहस्पति मंगलक संग युति
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
गुरु-मंगल योग ज्ञान (बृहस्पति) कें कर्म (मंगल) संग एकत्र करैत अछि — साहसी तथापि धर्मनिष्ठ, सैन्य/पुलिस नेतृत्व, भूमि स्वामित्व, भाई-बंधु समृद्ध होइत छथि।
ज्ञान + कर्म
साहसी तथापि धर्मनिष्ठ कर्म, सैन्य/पुलिस मे सफलता, भूमि स्वामित्व।
ई योग प्रायः अहाँकें एहन व्यक्ति बनाबैत अछि जे स्वाभाविक रूप सँ नेतृत्वक भूमिका दिस प्रवृत्त होइत छथि, जाहिमे रणनीतिक सोच आ निर्णायक क्रिया दुनू आवश्यक होइत अछि। ओ लोकनि प्रायः धर्मपरायणता सँ युक्त साहस प्रदर्शित करैत छथि, आ सेना, पुलिस वा अचल संपत्ति (रियल एस्टेट) जेकाँ क्षेत्रसभमे प्रायः सफलता प्राप्त करैत छथि। हुनकर जीवन-पथमे प्रायः संपत्ति अर्जन करब आ अपन भाई-बहिनकें सहयोग करब शामिल होइत अछि, जे ज्ञान आ गतिशील ऊर्जाक मिश्रणकें मूर्तरूप दैत अछि।
गुरु-मंगल योगक परिणाम सामान्यतः गुरु वा मंगलक दशा वा अंतर्दशाक कालमे सक्रिय होइत अछि। हुनकर संयुक्त प्रभाव प्रायः नेतृत्व, संपत्ति अधिग्रहण, वा महत्वपूर्ण उन्नतिक लेल अवसर लैत अछि।