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कलानिधियोगः
निर्माण नियम
बुध आ शुक्रक युति/दृष्टिसँ दोसर/पाँचिम मे बृहस्पति
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
कलानिधि योग — ललित कलाक संरक्षण, सृजनात्मक प्रयाससँ सम्पत्ति, विद्वत्ता-ख्याति, परिष्कृत रुचि एवं संस्कृति।
कलात्मक सम्पदा
कलासँ सम्पत्ति, विद्वत्ता-ख्याति, परिष्कृत संस्कृति।
ई योग सामान्यतः एहन व्यक्तिक रूपमे प्रकट होइत अछि जे कलात्मक अभिव्यक्ति आ बौद्धिक कार्य दिस स्वाभाविक झुकाव रखैत छथि। हुनकर करियर प्रायः रचनात्मक क्षेत्र, शिक्षाविद वा सांस्कृतिक संस्थानसभमे होइत अछि, जाहि सँ हुनकर प्रतिभाक माध्यम सँ महत्वपूर्ण आर्थिक समृद्धि प्राप्त होइत अछि। ओ परिष्कृत सौंदर्यबोध विकसित करबाक प्रवृत्ति रखैत छथि आ अपन विद्वत्तापूर्ण योगदान तथा सुसंस्कृत व्यवहारक लेल जानल जाइत छथि। सम्बन्ध साझा कलात्मक वा बौद्धिक रुचिसभक इर्द-गिर्द घूमय सकैत अछि।
कलानिधि योगक परिणाम प्रायः गुरु, बुध वा शुक्रक दशा वा अंतर्दशाक कालमे सक्रिय होइत अछि। ई काल प्रायः कलात्मक अभिव्यक्ति, विद्वत्तापूर्ण पहचान, आ रचनात्मक प्रयाससभक माध्यमसँ वित्तीय लाभक लेल अवसर लऽ अबैत अछि।