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लक्ष्मीयोगः
निर्माण नियम
नवम भावेश अपन/उच्च राशिमे केन्द्र अथवा त्रिकोणमे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
लक्ष्मी योगक नामकरण धनक देवीक नामपर भेल अछि। ई तखन बनैत अछि जखन नवम भावेश (भाग्य) अपन अथवा उच्च राशिमे केन्द्र अथवा त्रिकोणमे स्थित होथि। ई सबसँ शक्तिशाली धन योगोंमेसँ एक अछि, जे स्थायी समृद्धि, सुन्दर परिवेश, आ दिव्य स्त्रीशक्तिक आशीर्वाद प्रदान करैत अछि।
स्थायी धन
दीर्घकालिक समृद्धि, सुन्दर परिवेश, दिव्य आशीर्वाद।
लक्ष्मी योग वला व्यक्ति सभक जीवन प्रायः स्वाभाविक समृद्धि आ सुन्दर, आरामदायक वातावरण सँ चिन्हित होइत छैक। हुनकर करियर पथ आर्थिक स्थिरता दिस अग्रसर होइत छैक, आ ओ सभ प्रायः एकटा परिष्कृत जीवनशैली बनाए रखैत छथि। हुनकर स्वभाव मे प्रायः एकटा स्पष्ट शालीनता देखल जाइत छैक, जे दिव्य स्त्री शक्तिक आशीर्वाद आ हुनकर प्रयास सभकें समर्थन करय वला जन्मजात सौभाग्यकें प्रतिबिम्बित करैत छैक।
लक्ष्मी योगक पूर्ण फल सामान्यतः नवमेशक दशा वा अन्तर्दशा काल मे प्रकट होइत अछि। सक्रियता ओ ग्रह सभक काल मे सेहो होइत अछि जे नवमेशक संग युति करैत छथि वा ओकरा देखैत छथि, विशेष रूप सँ शुभ ग्रह।